
थाने में आत्मदाह करने वाली महिला की दो दिन बाद मौत, बेटे को छुड़ाने पहुंची थी
रायपुर. राजधानी के गंज थाना परिसर में खुद को आग लगाने वाली महिला ने दो दिन बाद गुरुवार को दम तोड़ दिया। डॉक्टरों के मुताबिक महिला की हालत बिगड़ती जा रही थी। पुलिस ने उसे 80 फीसदी झुलसे हालात में अस्पताल में भर्ती कराया था।
इससे पहले डॉक्टरों ने बताया कि महिला इतनी बुरी तरह से झुलस गई थी कि वह बयान देने की स्थिति में नहीं थी।डॉक्टरों ने उसके बोलने की स्थिति में नहीं होने की जानकारी दी थी। इससे उसका मजिस्ट्रेट के समक्ष मृत्युपूर्व बयान नहीं हो पाया था। यह बयान पूरे मामले के लिए महत्वपूर्ण था। पीडि़ता के परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस ने इन आरोपों को झूठा बताया है। इसकी पुष्टि के लिए महिला के मृत्युपूर्व बयान जरूरी है। इसी के आधार पर पूरे मामले की जांच चलेगी।
मंगलवार को सुबह करीब 11 बजे शिवानंद खमतराई निवासी चिक्की बाई ने थाना परिसर में खुद पर मिट्टी तेल डालकर आग लगा लिया था। वह आबकारी एक्ट में पकड़े गए अपने बेटे विकास उर्फ मोनू देवर को थाने से छुड़ाने आई थी।खुदकुशी करने की कोशिश के आरोप में पुलिस ने चिक्की बाई के खिलाफ आत्महत्या की कोशिश का मामला दर्ज किया है। दूसरी ओर अस्पताल में उसकी हालात देर रात में और तेजी से बिगडऩे लगी थी। इसके बाद डॉक्टरों ने उसे वेंटीलेटर पर रखा था। गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे महिला ने दम तोड़ दिया।
पुलिस के मुताबिक आग से जली मृतक महिला अपराधिक मामलों में शामिल है। वह अक्का बाई की बहू है। अक्का बाई गंज इलाके में लंबे समय से गांजा तस्करी, सट्टा और शराब बेचने का अवैध कारोबार संचालित कर रही थी। उम्र अधिक होने के कारण उसने अब ये काम बंद कर दिया है, लेकिन उसके कई रिश्तेदार इस काम लगे हुए हैं। विकास भी इस तरह के अवैध कारोबार से जुड़ा था और गुंडागर्दी करता था। गिरफ्तारी से बचने और पुलिस पर दबाव बनाने के लिए कई बार इस तरह के हथकंडे अपनाते हैं।
Published on:
19 Oct 2017 05:51 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
