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जब अटल ने ‘लघु अटल’ से सुनी अपनी कविता और भावविभोर होकर बोले – वाह

लघु अटल के रूप में विकास शर्मा ने जब पूर्व प्रधानमंत्री की लिखी कविता उन्हीं की शैली में गुनगुनाना शुरू किया तो अटल बिहारी बाजपेयी भावविभोर हो उठे।

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रायपुर. बात 25 दिसंबर 2009 की है, जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के जन्म दिवस पर शुभकामना देने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह अपने साथ लघु अटल को लेकर उनके दिल्ली स्थित निवास पर पहुंचे। लघु अटल के रूप में विकास शर्मा ने जब पूर्व प्रधानमंत्री की लिखी कविता उन्हीं की शैली में गुनगुनाना शुरू किया तो वे भावविभोर हो उठे। विकास शर्मा फिलहाल छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी में सहायक जनसंपर्क अधिकारी हैं। 3.4 मिनट की कविता की लाइनें इस प्रकार हैं...।

टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता, छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता,
मन हार कर मैदान नहीं जीते जाते, न मैदान जीतने से मन ही जीते जाते हैं,
आदमी को चाहिए कि वह जूझे, परिस्थितियों से लड़े, एक स्वप्न टूटे तो दूसरा गढ़े,
आदमी चाहे ए जीतना भी ऊंचा उठे,
अपने धरातल को न छोड़े, अंतर्यामी से मुंह न मोड़े,

संस्मरण सुनाते हुए विकास बताते हैं कि स्कूल के दिनों से उनकी भाषण शैली अटल जी के जैसी होने लगी। जय जवान, जय किसान और जय विज्ञान का नारा उनकी प्रगतिशीलता को दर्शाता है। इन सबके बीच मैं 1998 से कई मंचों पर भाषण करता रहा। उनकी कविता का पाठ चलता रहा।

विकास ने बताया कि कई वर्षों बाद साल 2009 को 25 दिसंबर के दिन उनके जन्मदिवस पर दिल्ली स्थित उनके निवास पर उन्हें बधाई देने के साथ ही उनकी कविता सुनाने का अवसर मिला। अटल जी के सामने लगभग 3.4 मिनट तक खड़े होकर उनकी ही शैली में उनकी कविता उन्हें सुनाना किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं।

वाजपेयी की कविताओं का छत्तीसगढ़ी अनुवाद
राजधानी के लोक कलाकार राकेश तिवारी ने करीब 20 वर्ष पहले अटल बिहारी वाजपेयी की सात कविताओं का छत्तीसगढ़ी में अनुवाद किया था। उन्होंने बताया कि कविताओं के मूल भावों व उसकी आत्मा को कायम रखते हुए छत्तीसगढ़ी में रूपांतरित कर लोक धुन में पिरोया था।
इन कविताओं का रूपांतरण
- कदम मिलाकर चलना होगा
- कौरव कौन- पांडव कौन
- उनकी याद करें
- मनाली मत जइयो
- जो बरसो तर
- राह कौन सी जाऊं मैं
- आओ फिर से दीप जलाएं