
पुलिस हेल्पलाइन नंबर में गाली-गलौज करने वालों में बिलासपुर आगे, रायपुर दूसरे नंबर पर
रायपुर. आपात स्थिति में मदद के लिए जो इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर (Police Helpline number) जारी किया गया है, कुछ लोग इसका दुरुपयोग कर रहे हैं। कभी गाली-गलौज तो झूठी सूचना तो कई बार अश्लील बात कर रहे हैं। सिविल लाइन कमांड सेंटर के अनुसार रायगढ़ में एक युवक ने मोबाइल नंबर 7684957851 से डायल 112 में (Chhattisgarh police Dial 112) कुल 4 हजार 708 बार कॉल किया। 2122 बार शरारती कॉल और गलत जानकारी देकर पुलिस व अन्य सेवाओं से जुड़े लोगों को उलझाया। 2391 बार कॉल करके बात नहीं किया, केवल महिला कर्मचारियों की बातें सुनते रहा। 167 बार बेवजह कॉल किया था। बाद में पुलिस ने उस युवक को गिरफ्तार कर लिया। रायपुर के एक युवक ने 810 बार कॉल किया है। छेडख़ानी के इरादे से 235 और 525 बार कॉल कर सिर्फ बात सुनता रहा।
गलत सूचना देने में बिलासपुर सबसे आगे
झूठी सूचना और अभद्र भाषा का प्रयोग करने के मामले में बिलासपुर सबसे आगे है। दूसरे नंबर पर रायपुर के लोग हैं। डायल 112 के सेंट्रल कंट्रोल एंड कमांड सेंटर के कर्मचारियों ने अक्टूबर 2018 से जुलाई 2019 तक विभिन्न जिलों से 6 हजार 479 कॉल रिसीव किए, जिसमें मदद मांगने के बजाय कॉल अटेंड करने वाली युवतियों व युवकों को गाली-गलौज व अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया गया। इनमें सबसे ज्यादा बिलासपुर के 1332 लोग शामिल हैं। रायपुर के 692 लोगों ने मदद मांगने के बजाय अभद्र और गाली-गलौज वाली भाषा का प्रयोग किया है।
रोज 5 हजार से अधिक ब्लैंक कॉल
डायल 112 की सेवाएं 11 जिलों में हैं। इनका कमांड सेंटर रायपुर के सिविल लाइन में है। इमरजेंसी सेवा लेने के अलावा रोज करीब 5 हजार ब्लैंक कॉल आ रहे हैं। गलत सूचना, गाली-गलौज या अश्लील बात करने वाले कॉलरों की पहचान करके उनके खिलाफ संबंधित थानों में शिकायत की जाती है। इसके बाद पुलिस कार्रवाई करती है। कई कॉलरों पर कार्रवाई की जा चुकी है।
आसानी से लोकेशन ट्रेक हो जाता है
डायल 112 में कॉल करते समय संबंधित व्यक्ति की पूरी जानकारी आ जाती है। इससे डायल 112 के टेक्निकल एक्सपर्ट उसका लोकेशन चेक करते हैं। फिर कार्रवाई के लिए संबंधित थाने की पुलिस को जानकारी भेजते हैं। यही वजह है कि फोन करने वालों का पता आसानी से चल जाता है। हालांकि ज्यादातर मामलों में पुलिस ने चेतावनी देकर छोड़ दिया है।
4 सितंबर 2018 को सभी इमरजेंसी सेवाओं के हेल्पलाइन नंबरों को हटाकर एक इमरजेंसी नंबर डायल 112 शुरू किया गया था। राज्य के 11 जिलों में सेवाएं शुरू की गई। इसके जरिए पुलिस, फायर और मेडिकल इमरजेंसी की सुविधाएं दी जा रही हैं। अब तक डायल 112 के जरिए 4 लाख लोगों ने पुलिस की मदद, 2 लाख ने मेडिकल और 8 हजार ने फायर ब्रिगेड की मदद ली है। इसमें पुलिस का वाहन 24 घंटे अलग-अलग पाइंट पर तैनात रहता है।
केस-1
लाखे नगर के14 वर्षीय नाबालिग ने जून में डायल-112 में कॉल किया और मेग्नेटो मॉल में आग लगने की सूचना दी। सेंट्रल कमांड से फायर बिग्रेड को संपर्क करके बुलाया गया। पुलिस मौके पर पहुंची तो वहां वैसा कुछ नहीं था। इसके दो दिन बाद उसी ने राज टॉकीज में फायर ब्रिगेड की जरूरत बताते हुए कॉल किया। पुलिस उस नाबालिग तक पहुंची। इसके बाद उसे चेतावनी देकर छोड़ दिया गया।
केस-2
ओडिशा निवासी युवक रायगढ़ की सीमा में आकर डायल 112 में अक्सर कॉल करता था। कभी झूठी जानकारी देता था, तो कभी गाली-गलौज करता था। इसके बाद ओडिशा भाग जाता था। ऐसा वह 4 हजार से अधिक बार कर चुका था। बाद में उसे पुलिस ने पकड़ कर कार्रवाई की।
सेवा का सदुपयोग कर सहयोगी बनें
पुलिस, फायर ब्रिगेड और मेडिकल इमरजेंसी में तत्काल मदद पहुंचाने के लिए डायल 112 शुरू किया गया है। इसमें कई लोग अनावश्यक बातें और गलत सूचना देने के साथ अभद्र भाषा का भी प्रयोग करते हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है। कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया है। यह सेवा लोगों के जान-माल की सुरक्षा के लिए है। इसका सदुपयोग कर पुलिस का सहयोगी बनना चाहिए।
धमेंद्र गर्ग, एसपी, डॉयल 112, रायपुर
Updated on:
04 Sept 2019 10:26 pm
Published on:
04 Sept 2019 10:21 pm
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