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Chawal Wale Baba: छत्तीसगढ़ के चावल वाले बाबा बटोर रहें हैं सुर्खियां, बागेश्वर सरकार तरह बताते हैं भक्तों का भविष्य

Chawal Wale Baba: आचार्य धीरेंद्र शास्त्री अपने चमत्कार के कारण काफी लोकप्रिय हुए हैं, जिसके बाद अब छत्तीसगढ़ के रहने वाले आचार्य नरेंद्र नयन शास्त्री की लोकप्रियता भी दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है. दूर-दूर से लोग अपनी समस्या का समाधान पाने के लिए चावल वाले बाबा के पास पहुंच रहे हैं.

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Chawal Wale Baba: जांजगीर-चांपा. चावल वाले बाबा के नाम से प्रसिद्ध आचार्य नरेंद्र नयन शास्त्री (Acharya Narendra Nayan Shastri) इन दिनों छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के प्रवास पर हैं. आचार्य नरेंद्र नयन शास्त्री चाय वाले बाबा एवं चावल वाले बाबा के नाम से प्रदेश सहित पूरे देशभर में लोकप्रिय हैं. आचार्य नरेंद्र नयन शास्त्री लोगों के द्वारा लाए गए चावल को देखकर उनका बीता हुआ कर और आने वाला कल बताते हुए उनके समस्या का समाधान करते हैं. हाल ही में आचार्य धीरेंद्र शास्त्री अपने चमत्कार के कारण काफी लोकप्रिय हुए हैं, जिसके बाद अब छत्तीसगढ़ के रहने वाले आचार्य नरेंद्र नयन शास्त्री की लोकप्रियता भी दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है. दूर-दूर से लोग अपनी समस्या का समाधान पाने के लिए चावल वाले बाबा के पास पहुंच रहे हैं.

दरअसल, आचार्य नरेंद्र शास्त्री के पास लोग अपने घर से एक मुट्ठी चावल और लाल रंग के मदार का फूल लेकर जाते हैं. इसे देखकर आचार्य नरेंद्र उनका नाम जन्म तिथि एवं उनकी समस्याएं उन्हें तत्काल बता देते हैं. साथ ही उनकी समस्याओं का समाधान भी उनको बताते हैं. आचार्य नरेंद्र नयन शास्त्री ने पिछले 18 साल से भोजन का त्याग कर दिया है. वह केवल लाल चाय और पानी पीकर ही जीवन जी रहे हैं. इस रहस्य को लेकर उनसे बात की गई तो उन्होंने बताया कि यह फैसला उन्होंने हठधर्मिता के कारण लिया है और उसके पीछे की कहानी उन्होंने बताई. आचार्य नरेंद्र नयन शास्त्री बताते हैं कि बचपन में वह और उनका परिवार काफी गरीब था और उनकी मां दूसरों के खेत में काम करके उनको बनारस पढ़ाई के लिए पैसे भेजा करती थी.

ऐसे में अपनी आर्थिक स्थिति को देखकर उन्होंने भोजन का त्याग कर दिया और केवल पानी और चाय पीकर ही जीवन यापन करने का निश्चय लिया, जो आज सालों बाद भी जारी है. आचार्य नरेंद्र शास्त्री अपने चमत्कार और सिद्धि के लिए तो जाने जाते ही हैं साथ ही उनका एक सराहनीय कार्य उनको लोगों के दिलों में बसा दिया है. आचार्य नरेंद्र बताते हैं कि वह जहां भी पूजा-पाठ भागवत के लिए जाते हैं वहां जो भी चढ़ावा आता है, जो भी पैसे मिलते हैं, जो भी सामान वहां चढ़ता है, वह उसी गांव के निर्धन कन्या को दान देकर आ जाते हैं. अपने साथ वहां से कुछ नहीं लाते हैं अभी तक उन्होंने 281 कुंवारी कन्याओं को उनकी शादी के लिए सहयोग किया है.