
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय (Photo Patrika)
CG News: @राकेश टेम्भुरकर। गुड्स एवं सर्विस टैक्स (जीएसटी) की जानकारी अब मोबाइल ऐप के जरिए मिलेगी। जीएसटी सार एल्पिकेशन डाउनलोड कर इसे देखा जा सकता है। अधिवक्ता विवेक सारस्वत द्वारा यह मोबाइल ऐप वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से संबंधित संपूर्ण कानूनी जानकारी, ई-बुक्स, विशेषज्ञ लेख एवं ताजा समाचार एक ही मंच पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार की गई है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसका विमोचन किया। साथ ही नवाचार की सराहना करते हुए जीएसटी के क्षेत्र में क्रांतिकारी बताया। अधिवक्ता ने बताया कि जीएसटी सार मोबाइल ऐप को छत्तीसगढ़ में ही विकसित किया गया है । इसे मध्य भारत की प्रसिद्ध ला फर्म सारस्वत एसोसिएट्स के अधिवक्ताओं द्वारा बनाया गया है। यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित चैटबॉट, वस्तुओं का रेट फाइन्डर एचएसएन कोड फाइन्डर, जीएसटी कैलंडर उपलब्ध है।
इसे व्यापारी हो, चार्टर्ड अकाउंटेंट हो अथवा कोई सामान्य नागरिक एआई बॉट सभी की शंकाओं का निवारण करने में सक्षम है। इसे पूरी तरह से निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि देश का हर छोटा-बड़ा व्यापारी और करदाता बिना किसी आर्थिक बोझ के इसका लाभ उठा सके। बता दें कि ऐप की डिज़ाइन और तकनीकी सहायता अधिवक्ता अभय तिवारी, बीना सिंग गौतम एवं प्रियांश शर्मा और डेवलप श्लोक आईटी सॉल्यूशन रायपुर की कंपनी ने किया है। विमोचन के अवसर पर अधिवक्ता प्रिंसी धावना, आस्था तिवारी और सुर्वी अग्रवाल भी उपस्थित रहीं।
व्यापारी
चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA)
टैक्स प्रोफेशनल
आम नागरिक
कानूनी जानकारी एवं ई-बुक्स – जीएसटी कानून की विस्तृत जानकारी
HSN कोड फाइंडर – वस्तुओं के सही कोड की पहचान
रेट फाइंडर – जीएसटी दरों की जानकारी
जीएसटी कैलेंडर – महत्वपूर्ण तिथियों की जानकारी
जीएसटी सार” ऐप को पूरी तरह से फ्री रखा गया है, ताकि छोटे से लेकर बड़े व्यापारी और आम करदाता बिना किसी आर्थिक बोझ के इसका लाभ उठा सकें।
रायपुर में स्टेट जीएसटी की टीम ने रामसागरपारा के भैंसथान स्थित अन्नपूर्णा कांप्लेक्स में लक्ष्मी कमर्शियल और एसआरएस ट्रेडर्स में छापे मारे। इस दौरान तलाशी में स्टील और आयरन का कारोबार करने वाले रितेश जैन एवं उसके भाई के फर्म में करोड़ों रुपए के बोगस बिलिंग करने के दस्तावेज बरामद हुए। इसकी जांच करने पर पता चला कि फर्म संचालक पिछले काफी समय से कच्चे में कारोबार कर रहे थे।
फर्जी बिलों के जरिए टैक्स चोरी का खेल चल रहा था। इसे देखते हुए सभी ट्रांजेक्शन की हिस्ट्री, कम्प्यूटर, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और पुराने बिल जब्त किए गए। साथ ही फर्म संचालकों से पूछताछ कर बयान लिया जा रहा है। वहीं बरामद बिल के आधार पर टैक्स चोरी का मूल्यांकन किया जा रहा है। बता दें कि वित्तीय वर्ष 2025-26 की समाप्ति को देखते हुए लगातार जीएसटी विभाग छापे मार रहा है।
Published on:
27 Mar 2026 11:09 am
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