
CG News: प्रदेश के कई मासूमों का बचपन जेल की चारदीवारी में बीत रहा है। लोहे की बैरकों के बीच खेलना-कूदना होता है। 50 से ज्यादा मासूम बच्चों को अपनी मां के जुर्म की सजा भुगतनी पड़ रही थी।
छत्तीसगढ़ की अलग-अलग जेलों में बंद महिला कैदियों के साथ उनके बच्चों को भी रहना पड़ रहा है। अलग-अलग मामलों में सजा काट रही महिला कैदी या विचाराधीन महिला बंदियों के साथ उनके बच्चों को भी रखा गया है। ऐसे बच्चों को पर्याप्त सुविधा और शिक्षा देने का दावा किया जाता है, लेकिन अधिकांश जेलों में यह नाकाफी है।
नेशनल क्राइम रेकॉर्ड ब्यूरो की ओर से हाल ही में भारत की जेलों में बंद कैदियों से संबंधित रिपोर्ट जारी की गई है। इसके तहत प्रदेश की अलग-अलग जेलों में 60 ऐसी महिला कैदी हैं, जिनके छोटे बच्चे हैं। ये आंकड़े 31 दिसंबर 2023 तक की है। ये बच्चे अपनी मां के साथ जेल में रहते हैं। इस तरह की महिला कैदियों के लिए अलग बैरक होती है। जेल में 6 साल से छोटे बच्चों को मां के साथ रखने का नियम है। इस कारण इन बच्चों को भी जेल में रखा गया है।
वर्ष 2023 में देश में कुल 1318 महिला कैदी थीं, जो अपने 1492 बच्चों के साथ जेल में रहती थी। इन महिला कैदियों में 1049 महिला कैदी विचाराधीन बंदी थीं, जिनके साथ 1191 बच्चे थे और 249 पर दोषसिद्ध हो चुका था। उनके साथ 272 बच्चे थे।
भारत में जेलों में महिला कैदी के साथ उनके बच्चों के रहने के मामले में प्रदेश छठे नंबर पर है। आंकड़ों के अनुसार पहले स्थान पर उत्तर प्रदेश है। यहां की जेलों में 311 महिला कैदी के साथ बच्चे हैं। इसके बाद वेस्ट बंगाल हैं, जहां 170 महिलाएं अपने बच्चों के साथ जेल में हैं। फिर बिहार में 167, मध्यप्रदेश में 126, झारखंड में 84 महिला कैदी अपने बच्चों के साथ जेल में हैं। इसके बाद छत्तीसगढ़ का नंबर है। यहां 60 महिलाएं अपने बच्चों के साथ जेल में हैं।
Updated on:
10 Oct 2025 02:18 pm
Published on:
10 Oct 2025 02:16 pm
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