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हुनर को तराश रहे सिटी के पेंटिंग आर्टिस्ट, रंगों में भर रहे फीलींग

बिजनेस, जॉब और पढ़ाई के साथ पेंटिंग क्लास में दे रहे घंटों टाइम...

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jaipur

सुमित यादव @ रायपुर . एक एेसा फील्ड है जिसमें आप को पूरी शिद्दत के साथ काम करना होता है, चाहे एक घंटे ही वर्क क्यों न हो लेकिन पूरे दिलो-दिमाग से पूरा करना होता है। इसके बाद मन में एक सुकून का एहसास होता है। इसी चाह के साथ शहर के कुछ बिजनेसमैन, स्टूडेंट्स, इंटीरियर डिजाइनर हैं जो अपने प्रोफेशन के साथ-साथ और जॉब या पढ़ाई से टाइम निकालकर अपने शौक को भी पूरा कर रहे हैं। वे रोज एक से दो घंटे पेंटिंग क्लास के लिए समय निकालते हैं।

इनके लिए पेशा बना पार्ट टाइम

अक्सर एेसा होता है कि लोग पेशे को फूल टाइम और आर्ट को पार्ट टाइम देते हैं, लेकिन यहां मामला कुछ अलग है। कोटा के शैलेश वर्मा प्राइमरी की पढ़ाई के दौरान से ही पेंटिंग में रुचि रखते थे। आगे चलकर वे इंटीरियर और एजुकेशन फोटोग्राफी को बतौर प्रोफेशन अपना लिया। छह साल मुंबई में रहे और वहां बेस्ट फोटोग्राफर का अवार्ड जीता। पैरेंट्स बुजुर्ग हैं इसलिए उन्हें लौटना पड़ा। अब पेशा पार्ट टाइम बन गया है जबकि हुनर को ज्यादा वक्त दे रहे हैं। वे इन दिनों लाइव प्रोट्रेट बना रहे हैं।

पेंटिंग क्लास के लिए छोड़ी इंटीरियर डिजाइनिंग

मारूति लाइफ स्टाइल की रहने वाली रीतिका अग्रवाल बताती है कि मैं इंटीरियर डिजाइनिंग में पढ़ाई कर रही थी। इसके साथ ही मुझे पेंटिंग करना बहुत पसंद था। लेकिन इंटीरियर फील्ड से ज्यादा मुझे पेंटिंग करना बेहर पसंद था। इसलिए मैंने एक साल पहले इंटीरियर की पढ़ाई छोड़कर कर पेंटिंग क्लास ज्वाइन किया। मुझे पूरे सात माह हो गए है पेंटिंग करते हुए। सबसे ज्यादा मुझे नेचर और क्रिएेटिव पेंटिंग बनाना पसंद है।

एग्जीबिशन देखकर शुरू की पेंटिंग क्लास

कोटा की रहने वाली निशा अग्रवाल बताती है कि मुझे तस्वीर देखना बहुत पसंद है खासतौर से एेसे जिसमे नेचर के रंग हो। दो साल पहले मैं रायपुर में आयोजित पेंटिंग एग्जीबिशन देखने गई और उसी समय से मैंने पेंटिंग क्लास जॉइन कर, जाना शुरू कर दिया। अभी मैं स्टूडेंट्स हूं लेकिन पढ़ाई करने के बाद जो भी टाइम बचता है मैं पेंटिंग क्लास में देती हूं। पेंटिंग में सबसे ज्यादा मुझे प्रोट्रेट और नेचर की पेंटिंग करना बेहद पसंद है। मुझे एक साल हो गए पेंटिंग करते हुए। इस प्रोफेशन को शौक के रूप में करती हूं, मुझे अपना कॅरियर सीए में बनाना है लेकिन पेंटिंग करने से सुकून मिलता है।

मम्मी की पेंटिंग आर्ट से मिली प्रेरणा

सिद्धार्थ लुंकड़ बताते है कि वे मेडिकल स्टोर का बिजनेस करते हैं। इसके साथ ही पेंटिंग करना उन्हें बहुत पसंद है। वे कहते हैं जब मैं छोटा था तो मम्मी स्केचिंग और पेंटिंग किया करती थी। जिनकी पेंटिंग देखकर मैं भी कुछ न कुछ करने लगता था। तब से ही मुझे पेंटिंग का शौक हुआ, लेकिन मेडिकल बिजनेस में इतना ज्यादा बिजी हुआ कि कुछ साल रेगुलर नहीं कर पाया। लेकिन अभी पांच सालों से मैं २४ घंटे में पूरे एक से दो घंटे पेंटिंग क्लास को देता हूं। ह्यूमन से जुड़ी पेंटिंग बनाता हूं। मुझे सबसे ज्यादा जीवंत पेंटिंग बनाना बेहद पसंद है।

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