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फूटबाल की दीवानगी ऐसी कि 72 की उम्र में भी युवाओं संग सरपट भागते हैं कोच लामा

सब जूनियर अंडर-14 में 32, जूनियर अंडर-19 में 51 व संतोष ट्राफी में 12 खिलाड़ी खेल चुके। अंबिकापुर के अडानी फूटबाल एकेडमी के कोच रामचंद्र ने अब तक 99 फुटबॉलरों को तराश चुके है।

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फूटबाल की दीवानगी ऐसी कि 72 की उम्र में भी युवाओं संग सरपट भागते हैं कोच लामा

फूटबाल खेलते कोच रामबहादुर लामा

अशोक विश्वकर्मा @ फुटबॉल के जादूगर कहे जाने वाले बिश्रामपुर निवासी रामबहादुर लामा किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। इन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर कई फुटबॉल प्रतियोगिताएं खेलीं तथा इनमतें बेहतर प्रदर्शन कर दर्जनों ट्रॉफी अपने नाम किया है। आज इनकी उम्र 72 वर्ष हो चुकी है। इस उम्र में लोग दूसरों पर निर्भर हो जाते हैं, लेकिन आज भी वे युवाओं की तरह मैदान में दौड़ लगाते हैं।

रामबहादुर लामा के दिल से फुटबॉल की दीवानगी कम नहीं हुई है, वे अपने जमाने में बेहतर फुटबॉल खिलाड़ी तो रहे ही थे, आज वे कुशल कोच हैं। उन्होंने अपनी कोचिंग के माध्यम से अदानी सरगुजा फुटबॉल अकादमी अंबिकापुर को बेहतर ऊंचाई तक पहुंचाया है। इनसे फुटबॉल की बारीकियां सीख कर 99 खिलाड़ी प्रदेश से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहचान बना चुके हैं। लामा से फुटबॉल का गुर सीख कर सब जूनियर अंडर-14 में 32, जूनियर अंडर-19 में 51 व संतोष ट्राफी में 12 खिलाड़ी खेल चुके हैं। इसी तरह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सब जूनियर अंडर-14 के लिए 2 खिलाड़ी वर्ष 2016-17 व 2017-18 में डेनमार्क में खेल चुके हैं, जबकि दो खिलाड़ी वर्ष 2018 में ईरान की जमीन पर फुटबॉल में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं।

3 खिलाड़ियों को मिल चुकी है नौकरी
रामबहादुर लामा अदानी सरगुजा फुटबॉल अकादमी के वर्ष 2014 से कोच के रूप में सेवा दे रहे हैं। वे अब तक 99 खिलाड़ी तरास चुके हैं। बेहतर प्रदर्शन करने वाले 3 खिलाडिय़ों को खेल कोटे से अलग-अलग सुरक्षा बलों में नौकरी भी मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि वे जब तक सलामत रहेंगे, फुटबॉल को आगे बढ़ाने का काम करते रहेंगे।

मोबाइल गेम छोड़ मैदान में आएं युवा
उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि शरीर अपना है, इसे फिट रखें। दूसरों को न देखें कि वह क्या कर रहा है। विशेषकर आज के युवाओं को लेकर उन्होंने कहा कि वे मोबाइल की दुनिया से बाहर निकलें। मोबाइल मादक पदार्थों से भी ज्यादा नशीला बन चुका है। लोग मोबाइल से निकल कर मैदान में आएं और पढ़ाई के साथ-साथ खेल में भी रुचि लें।

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