* प्रदेश की जनता नहीं पंहुचा पा रही सरकार तक अपनी समस्या, मंदिर हसौद में टोल नाका निर्माण का तीन महीने से हो रहा खुला विरोध फिर भी सरकार खामोश
रायपुर। विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने के बाद से प्रदेश में रूकी जनता की सुनवाई नई सरकार के गठन होने के करीब तीन माह बाद भी शुरू नहीं हो पाई है। स्थिति यह है कि कलक्टरों ने हर सप्ताह लगने वाले जनदर्शन कार्यक्रम को भी बंद कर दिया है। वहीं सीएम हाउस का जनदर्शन भी शुरू नहीं हो सका है। हालांकि कुछ दिनों तक मुख्यमंत्री भूपेश बघेल राज्य अतिथि गृह पहुना में आम जन से मुलाकात कर ज्ञापन जरूर ले रहे थे।
सूत्रों का कहना है कि नई सरकार ने ही एक तरह से जनदर्शन कार्यक्रमों पर रोक लगा दी है। दरअसल, प्रदेश में आम लोगों की समस्याओं को सुनने के लिए अलग-अलग स्तर पर सेल बना है। इनमें उनकी शिकायत तो दर्ज होती है, लेकिन पूरी तरह से सुनवाई नहीं होती है। इससे लगातार शिकायतों का ग्रॉफ बढ़ते जा रहा है। राज्य सरकार की मंशा है कि अलग-अलग शिकायतों को बंद कर एक-दो शिकायत प्रणाली को ही जारी रखा जाएगा।फिलहाल अफसरों का कहा गया है कि पूर्ववर्ती सरकार के समय मिली सभी समस्याओं का प्राथमिकताओं से निराकरण किया जाए।
भाजपा प्रवक्ता सच्चिदानंद उपासने ने कहा, सरकार को एसआइटी गठन और बदलापुर की राजनीति से फुर्सत मिले, तो जनता की परेशानी की तरफ ध्यान जाएगा। प्रदेश में लगातार अपराध और पलायन बढ़ते जा रहा है। विकास के सारे काम लगभग ठप पड़ गए हैं। सरकार अपना पूरा समय सिर्फ चुनावी घोषणा पत्र को पूरा करने और चुनावी आरोपों को सिद्ध करने में लगी है।
कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा, सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जनता की सेवा के लिए 24 घंटे उपलब्ध रहते हैं। सरकार बनाने के बाद कलेक्टरों को साफ कहा है कि जनता की समस्याओं का त्वारित निराकरण किया जाए। इसका असर यह हुआ है कि सप्ताह में एक दिन जनदर्शन लगाने वाले कलेक्टर अब रोज ऑफिस में बैठकर समस्याओं का निराकरण कर रहे हैं।
आवेदनों की स्थिति (फ़रवरी में)
| प्राप्त आवेदन | लंबित | निराकृत | कुल |
| वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा | 59 | 510 | 569 |
| वेब द्वारा | 1718 | 1758 | 3477 |
| पोस्ट और मेल द्वारा | 25540 | 32251 | 57792 |
| कुल आवेदन | 27317 | 34519 | 61838 |