
अस्पताल के बाहर मृतकों के परिजन (photo Patrika)
Raipur News: @अजय रघुवंशी। रामकृष्ण हॉस्पिटल में सीवरेज सफाई के दौरान तीन युवाओं की दर्दनाक मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ आक्रोश दूसरे दिन भी दिखाई दिया। दूसरे दिन भी बड़ी संख्या में पुलिस बल और समाज के लोग मौजूद रहे। वहीं इस मामले में देर शाम गटर की सफाई करते समय तीन सफाई कर्मियों की मौत पर पुलिस ने ठेकेदार और अन्य जिम्मेदारों पर केस दर्ज कर लिया है। मंगलवार रात से बुधवार शाम तक 21 घंटे लंबी मैराथन बातचीत के बाद उत्कल समाज के प्रतिनिधि और हॉस्पिटल प्रबंधन के बीच मुआवजे को लेकर बातचीत तय हुई।
इस तनावपूर्ण बातचीत में मृतकों के परिजनों को 30-30 लाख रुपए मुआवजा, बच्चों की शिक्षा और परिवार के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं देने पर सहमति बनी है। समाज के प्रतिनिधि आशीष तांडी, शैलेंद्र नायक, संतोष सोनी के मुताबिक प्रबंधन ने पीडि़त परिवार को चेक सौंप दिया है, वहीं बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर एग्रीमेंट किया गया है, ताकि भविष्य में प्रबंधन वादाखिलाफी न कर सके।
दूसरे दिन भी अस्पताल परिसर में गहमागहमी और तनाव का माहौल बना रहा, जहां समाज के पदाधिकारियों ने प्रबंधन पर लगातार दबाव बनाए रखा। मुआवजे की घोषणा के बाद हालात कुछ शांत जरूर हुए, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सीवरेज की सफाई में मानव बल के सीधे इस्तेमाल, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और जिम्मेदार एजेंसियों की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही उत्कल समाज ने राज्य सरकार से साफ तौर पर मांग रखी है कि ऐसे हादसों को रोकने के लिए सरकार ठोस और सख्त कानून बनाए, ताकि भविष्य में किसी और को अपनी जान न गंवानी पड़े।
रामकृष्ण अस्पताल के सीवरेज टैंक की सफाई करने के लिए मंगलवार शाम सात बजे तीन सफाई कर्मचारियों को गटर के नीचे भेजा गया। जानकारी के मुताबिक सीवरेज में हाइड्रोजन सल्फाइड, मीथेन गैस की अधिकता और बिना सुरक्षा उपकरण के नीचे उतरने के बाद एक के बाद एक तीन सफाई कर्मचारियों की मौत हो गई। कार्बन डाई ऑक्साइड और कार्बनमोनो ऑक्साइड गैसों की सांद्रता की वजह से दम घुटने की वजह से कुछ ही मिनटों में कर्मचारियों ने दम तोड़ दिया।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। इसके वास्तविक दोषी कौन हैं? इसका पता लगाया जा रहा है। मंगलवार को रामकृष्ण अस्पताल के सीवरेज टैंक को साफ कराया जा रहा था। इसके लिए गोविंद सेंद्रे, अनमोल मांझी और सत्यम को लगाया गया था। तीनों एक-एक करके गटर में उतर गए। गटर की जहरीली गैस से उनका दम घुट गया। इससे उनकी मौत हो गई। इस मामले में टिकरापारा पुलिस ने मर्ग कायम किया।
तेलीबांधा इलाके के होटल अशोका बिरयानी में 18 अप्रैल 2024 को ऐसी ही घटना हो चुकी है। इसमें होटल के सीवरेज टैंक में फंसे कचरे को साफ कराया जा रहा था। इस काम में होटल के ही दो इलेक्ट्रीशियन धमतरी निवासी डेविड साहू (19) और जांजगीर-चांपा के नील कुमार पटेल (30) को लगाया गया था। दोनों का गटर में उतरने कहा गया। दोनों नीचे उतर गए। जहरीली गैस की चपेट में आने से उनकी मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने होटल संचालक, मैनेजर के खिलाफ केस दर्ज किया था। इसी तरह गुड़ाखू फैक्ट्री में भी तीन लोगों की मौत हो गई थी।
Updated on:
19 Mar 2026 04:29 pm
Published on:
19 Mar 2026 04:28 pm
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