मरीजों को नियमित दवा नहीं मिलने पर ये केस गंभीर होकर एमडीआर टीबी बन जाएगा। यह सामान्य टीबी से बहुत घातक होता है। अब केंद्र सरकार ने राज्यों को दवा खरीदने के लिए कह दिया है। हालत ये है कि इसके लिए फंड भी नहीं मिला है। इधर सीजीएमएससी ने भी दवा सप्लाई के लिए हाथ खड़े कर दिया है। उन्होंने दो टूक कह दिया है कि चार माह दवा की सप्लाई नहीं कर पाएंगे। इससे मरीजों की समस्या कम होने के बजाय बढ़ती जा रहा है। सीबी-नॉट जांच बंद होने का कारण ये है कि इसकी किट की सप्लाई अनियमित है। इस कारण ये जांच भी लंबे समय से बंद है। प्रदेश में जिलों के अनुसार मरीजों को दवा बांटी जाती है। मरीज भी दवा के इंतजार में परेशान हो रहे हैं। ये ऐसे मरीज हैं, जो जरूरतमंद हैं और मेडिकल स्टोर से महंगी दवा खरीदकर नहीं खा सकते।