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300 कोरोना मरीजों का दिमाग पढ़ेंगे डॉक्टर, बताएंगे वायरस ने कितना पहुंचाया है नुकसान

डॉक्टर बताएंगे कि वायरस ने आपके दिमाग में कितना गहरा असर डाला है। कितना नुकसान पहुंचाया है। इसे 'कोरोना का दिमाग पर प्रभाव या कोरोना के कारण बुद्धिमत्ता पर असरÓ प्रोजेक्ट नाम दिया गया है। इस प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) ने स्वीकृति दे दी है।

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300 कोरोना मरीजों का दिमाग पढ़ेंगे डॉक्टर, बताएंगे वायरस ने कितना पहुंचाया है नुकसान

300 कोरोना मरीजों का दिमाग पढ़ेंगे डॉक्टर, बताएंगे वायरस ने कितना पहुंचाया है नुकसान

रायपुर. आप कोरोना संक्रमित हुए। कोरोना को मात दे चुके हैं। मगर, क्या आप खुद की पहले जैसा मानसिक रूप से स्वस्थ महसूस करते हैं या नहीं? अब पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग के डॉक्टर इस बात का ही पता लगाने जा रहे हैं। डॉक्टर बताएंगे कि वायरस ने आपके दिमाग में कितना गहरा असर डाला है।

कितना नुकसान पहुंचाया है। इसे 'कोरोना का दिमाग पर प्रभाव या कोरोना के कारण बुद्धिमत्ता पर असर' प्रोजेक्ट नाम दिया गया है। इस प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) ने स्वीकृति दे दी है। मेडिकल कॉलेज की एथिकल कमेटी के सामने प्रजेंटेशन भी हो चुका है। बस वहां से मंजूरी का इंतजार है, जो संभवत: इसी हफ्ते जारी हो सकती है।

'पत्रिका' को विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक कॉलेज से संबद्ध डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल में भर्ती होकर, स्वस्थ होकर घर लौट चुके 300 मरीजों को इस प्रोजेक्ट में बतौर सैंपल शामिल किया जाएगा। जिनकी उम्र 18 से 50 वर्ष के बीच होगी। इनसे सहमति पत्र भरवाकर जनवरी से रिसर्च शुरू किए जाने की तैयारी है।

विभाग का दावा है कि देश में कोरोना मरीजों पर मानसिक तनाव पर कई शोध हुए हैं, मगर, उनकी बुद्धिमत्ता पर यह पहला शोध है। यहां यह भी बताना जरूरी है कि आंबेडकर अस्पताल की पोस्ट कोविड ओपीडी में रोजाना 10 मरीज पहुंच रहे हैं, जिनमें से 40 प्रतिशत व्यक्तियों को मनोरोग संबंधी समस्या पाई गई हैं। यहीं से इस प्रोजेक्ट की परिकल्पना शुरू हुआ। इसकी तैयारियां अंतिम चरणों में हैं।

3 चरणों में होगा रिसर्च-

अक्टूबर से मरीज स्वस्थ होना शुरू हुए हैं। जनवरी में उनके स्वस्थ होने के 3 महीने पूरे होंगे, तब से प्रोजेक्ट भी शुरू होगा। इन मरीजों को 3, 6 और 12 महीने में बुलाया जाएगा। 1 घंटे उनके दिमाग का परीक्षण होगा और फिर उसी दिन डिस्चार्ज भी कर दिया जाएगा। संभव है कि जनवरी 2022 में इसका रिसर्च सामने होगा। इसका डेटा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजा जाएगा।

सिर्फ 1.50 लाख रुपए खर्च

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि यह बहुत सस्ता रिसर्च प्रोजेक्ट है। जिसमें सिर्फ डेढ़ लाख रुपए खर्च आ रहा है। इसमें २ सॉफ्टवेयर की आवश्यकता पड़ रही है। एक तो इंडिया बेस्ड है, दूसरी विदेश से इंपोर्ट होगी। रीडिंग लेने के लिए विशेष प्रकार के चिप चाहिए होते हैं, जो विदेश से आएंगे।

हमारा उद्देश्य सिर्फ बुद्धिमत्ता का एनालिसिस करना है, ताकि जान पाएं और दुनिया को यह बता पाएं कि वायरस किस प्रकार दिमाग पर असर डालता है।

-डॉ. मनोज साहू, विभागाध्यक्ष, मनोरोग विभाग, पं. जेएनएम मेडिकल कॉलेज