इसलिए उठ रहे हैं सवाल : छत्तीसगढ़ के स्कूलों में छात्र व शिक्षक मिल रहे कोरोना संक्रमित
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वहीं, स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने स्कूल खोलने का रिस्क सोच-समझकर लिया है। क्योंकि स्कूलों का न खुलना बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ माना जाता है, दूसरी तरफ कोरोना के संक्रमण का भी खतरा है। इसलिए कैबिनेट में सरकार को कड़ा फैसला लेना पड़ा। सिंहदेव ने कहा कि कैबिनेट में तय किया गया कि 9वीं,10वीं,11वीं और 12वीं के स्कूल खोले जाएं।
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उन्होंने कहा कि स्कूल आना या न आना छात्रों का अपना निर्णय होगा, अनिवार्यता नहीं है। माता-पिता समझते हैं कि यह रिस्क नहीं है, तो स्कूल भेज सकते हैं। स्कूल नहीं खोलने पर भी सरकार के ऊपर दबाव था कि पढ़ाई प्रभावित हो रही है। स्कूल खोलने पर भी यह दबाव है कि संक्रमण फैल सकता है। स्कूल संचालकों को शिक्षकों की कोरोना जांच करवानी चाहिए। छात्रों में अगर लक्षण दिखते हैं तो स्कूल आने से मना करें, जांच करवाएं। स्वास्थ्य मंत्री ने चेताया है कि सतर्कता नहीं बरतेंगे तो इसमें कोई दो-राय नहीं कि संक्रमण फैल सकता है।
ये भी पढ़ें...[typography_font:14pt;" >रायपुर. छत्तीसगढ़ में कोरोना वायरस संक्रमण काल में स्कूल खोलने पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि छात्रों के भविष्य को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। खासकर के ऐसे विद्यार्थी जिनके पाठ्यक्रम में प्रैक्टिकल है। अब बिना क्लास अटेंड किए ऑनलाइन प्रैक्टिकल तो होगा नहीं। अब देखते हैं कि कहां-कहां से ऐसे मामले आ रहे हैं। जिन क्षेत्रों में मामले आ रहे हैं, उन स्कूलों को बंद रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह बात शुक्रवार शाम को असम प्रवास से लौटने के बाद कही।
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