
रायपुर. श्रीशंकराचार्य कोविड केयर सेंटर में एक परिवार को किसी दूसरे का शव सौंप देने पर शुक्रवार को जमकर हंगामा हुआ। श्मशानघाट में अंतिम संस्कार के ठीक पहले इसका खुलासा हुआ। कोरोना संक्रमित होने के कारण शव पैक किया हुआ था। जिसके बाद निगम के कर्मचारी शव वाहन से मुक्तिधाम पहुंचे। पीछे-पीछे परिजन पहुंच गए। परिजनों में मृतक की बेटी भी थी। उसने पारदर्शी झिल्ली होने के कारण चेहरा देख लिया और कहा कि यह पापा का शव नहीं है। इस पर घर के अन्य सदस्यों ने इस ओर ध्यान दिया। जिसके बाद परिवार शव लेकर अस्पताल लौटे। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया। अस्पताल प्रबंधन ने गलती मानते हुए परिजनों को सदस्य का शव सौंपा।
मृतक की बेटी ने बताया कि पिता को 23 अगस्त को हॉस्पिटल में दाखिल किया गया। उनको शुगर भी थी, जिसकी दवा सुबह हॉस्पिटल के गेट पर दी गई थी। लेकिन मरीज तक दवा शाम को पहुंची। शव दूसरे का था जिसमें पिता का नाम लिखकर प्रबंधन ने हमको दे दिया था। जिसके कारण अंतिम संस्कार शाम 4 बजे हुआ।
बिलासपुर में भी हो चुके शव एक्सचेंज
बीते दिनों मजूमदार परिवार के मृतक की कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद शमशान से शव सिम्स में उठवाया गया था। दो दिन बाद जब वे लेने पहुंचे तो शव नहीं मिला। पूछताछ में पता चला शव अग्रवाल परिवार को दे दिया। उन्होंने अंतिम संस्कार कर दिया। इस पर पत्रिका की खबर के बाद व्यवस्था बनाई गई। अब कोई शव बिना फोटो और आईकार्ड देखे नहीं दिया जाता।
Published on:
05 Sept 2020 07:07 pm

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