
Crime News: रायपुर को सेफ मानकर खोला ठगी का सेंटर, अमरीका-चीन सहित कई देशों तक कनेक्शन
फर्जी कॉल सेंटर खोलकर अमरीकी नागरिकों से ऑनलाइन ठगी करने वालों का बड़ा इंटरनेशनल गिरोह है। दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों में कई कॉल सेंटरों पर छापे पड़ चुके हैं। इस कारण गिरोह ने रायपुर को सेफ मानते हुए कॉल सेंटर शुरू किया था। साइबर ठगी करने वाला यह बड़ा गिरोह है। इसमें अमरीका, भारत और चीन का लिंक मिला है। उल्लेखनीय है कि इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर रायपुर कमिश्नरेट ने मंगलवार-बुधवार की रात गंज और राजेंद्र नगर इलाके में तीन फर्जी कॉल सेंटरों रॉकलेन बिजनेस सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड पर छापे मारकर 42 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
आरोपी लोन के नाम पर अमरीकी नागरिकों को झांसा देकर ऑनलाइन ठग रहे थे। ठगी का पूरा खेल 6 लेयर में चलता था। हर लेयर में अलग-अलग लोग रहते हैं, जो एक-दूसरे को नहीं जानते हैं। कॉल सेंटर में पकड़े गए आरोपी पहले लेयर के हैं। उन्हें दूसरे लेयर में काम करने वालों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं हैं। इनके पकड़े जाने के बाद अन्य लेयर में शामिल आरोपियों ने अपने मोबाइल बंद कर दिए हैं।
तीनों कॉल सेंटरों का संचालन सुपरवाइजर रोहित यादव, गौरव यादव और सौरभ सिंह करते थे। इसमें 15 से 25 हजार वेतन और कमीशन देकर कर्मचारियों को रखा था। कर्मचारी यूएसए के बैंकों में लोन के लिए आवेदन लगाने वालों को बैंक लोन के लिए कॉल करते थे। इसके लिए क्रेडिट स्कोर सुधार के नाम पर उन्हें ठगते थे। इसे भारतीय करेंसी में बदलकर अहमदाबाद भेजा जाता था। ठगी की राशि में सुपरवाइजर का 2 फीसदी कमीशन रहता था।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि अमरीका में 200-300 डॉलर जैसी छोटी रकम की शिकायत या फर्जी चेक लगने पर रकम तत्काल खाताधारक के खाते में में आ जाती है। इसके 48 घंटे के बाद जांच करते हैं। अगर जांच धोखाधड़ी या किसी तरह की गड़बड़ी सामने आती है, तो उतने ही डॉलर खाताधारक के खाते से वापस ले लेते हैं। इसी सुविधा का आरोपियों ने फायदा उठाया। कॉल सेंटर खोलकर अमरीका के अलावा इस तरह की सुविधा वाले अन्य देशों के लोगों भी ठग रहे थे।
पहला चरण (डेटा प्राप्त कर कॉल करना)-कॉलिंग ग्रुप
-वाट्सऐप-टेलीग्राम ग्रुप के माध्यम से अमरीका के बैंकों में लोन के लिए आवेदन करने वाले ग्राहकों का डेटा आता था। इसके बाद कॉल सेंटर के कॉलिंग ग्रुप ग्राहकों को लोन के लिए कॉलिंग ऐप के माध्यम से कॉल करते थे। ऐप के स्क्रीन में जो बोलनी थी, वह अंग्रेजी में लिखी रहती थी। ग्राहक लोन के लिए तैयार होता था, फिर उन्हें ठगने का काम शुरू होता था।
दूसरा चरण (क्रेडिट स्कोर सुधारने का दावा करना)-डिपॉजिट ग्रुप
-लोन लेने के लिए सहमत होने वाले ग्राहकों से बैंक अकाउंट के डिटेल लेकर कंपनी के ग्रुप में कॉल सेंटर के कर्मचारी डाल देते थे। फिर डेटा चेक करके ग्राहक की डिटेल बताते थे। क्रेडिट स्कोर सुधारने का आश्वासन देकर कुछ देर बाद कॉल करने बोलते थे। ग्राहक के खातों का डिटेल कॉल सेंटर का सुपरवाइजर अहमदाबाद में बैठे मास्टरमाइंड के बनाए वॉट्सऐप ग्रुप में डालता था, ग्रुप में विदेशों से भी कुछ लोग जुड़े रहते थे।
तीसरा चरण (फर्जी चेक बैंकों में लगाना)- टेक्निकल ग्रुप
Published on:
27 Mar 2026 01:18 am
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