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रायपुर में अनोखी शादी: बोल-सुन नहीं सकते, बंधे अहसास के रिश्ते से

वीरभ्रदासन में डाली वरमाला, विभिन्न संस्थाओं ने दिल खोलकर की मदद

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रायपुर में अनोखी शादी: बोल-सुन नहीं सकते, बंधे अहसास के रिश्ते से

समता कॉलोनी स्थित गायत्री मंदिर में लक्की और मीनाक्षी बंधे परिणय सूत्र में ।

ताबीर हुसैन @ रायपुर.आपने शादियां तो कई देखी होंगी लेकिन आज आपको एक अनोखी शादी के बारे में बता रहे हैं। दूल्हा-दुल्हन बोल व सुन नहीं सकते, लेकिन भावनाओं के बंधन के साथ सात फेरे लिए। रायपुर के सैकड़ों लोग इस अनोखे विवाह के साक्षी बने। न सिर्फ आशीर्वाद दिया बल्कि शादी को संपन्न कराने में खर्च के भी सहभागी बने। समता कॉलोनी का गायत्री मंदिर इस यादगार शादी का गवाह बना। यहां के पंडित ने मंत्रोच्चारण के साथ विवाह कराया। नवदंपती को तो पंडितजी के निर्देश और मंत्र सुनाई नहीं दे रहे थे लेकिन वहां मौजूद साइन लैंग्वेज के ज्ञाताओं ने उन्हें इशारों से सारी बात बताई। दूल्हा दुर्ग निवासी लक्की श्रीवास्तव है जबकि दुल्हन रायपुर की मीनाक्षी है। दूल्हे के पिता है मां नहीं है जबकि दूल्हन नारी निकेतन से पांच साल पहले कोपलवाणी शिफ्ट की गईं हैं। पद्मा शर्मा ने बताया, मैं दुर्ग गई थी। वहां मंदिर के बाहर एक लड़का मुझे नारियल बेचते दिखा। मैंने नारियल लेते वक्त उससे बात करना चाही लेकिन मैं तुरंत समझ गई कि वह बोल सुन नहीं सकता। मैंने उससे साइन लैंग्वेज में बातें की। बातचीत में लड़का शरीफ लगा। मैंने उससे शादी के बारे में पूछा। जब उसने इच्छा जताई तो मैंने मीनाक्षी के बारे में उसे बताया। इस तरह बात आगे बढ़ी और शादी पक्की हो गई।

11 साड़ियों में विदा करना चाहती थे

हम तो इसे 11 साड़ियों में ही विदा करना चाहते थे लेकिन कुछ ग्रुप में सूचना डालते ही मदद के लिए हाथ बढऩे लगे। देखते-देखते हर वर्ग के लोग हमसे जुड़ते गए। फिर हमने तय किया कि शादी धूमधाम से की जा सकती है।

पंडितजी का रोचक अंदाज

गायत्री मंदिर में जिस पंडित ने शादी कराई उनका अंदाज ही निराला था। वे मंत्रोच्चारण और वैवाहिक प्रक्रिया के साथ हास्य का पुट भी घोल रहे थे। उन्होंने कुछ दूल्हा-दुल्हन की तरफ से गाने भी गाए। दूल्हे की तरफ से गाया- आए हो मेरी जिंदगी में तुम बहार बनके। दुल्हन की ओर से गाया- जनम- जनम का साथ है तुम्हारा-हमारा। जब वरमाला डाल दी गई तो गाने लगे बहारों फूल बरसाओ।

ऐसे हुई मंगलसूत्र की व्यवस्था

शताब्दी पांडे ने बताया, जब सारी चीजेंं हो गईं तो एक चीज की कमी खलने लगी। सोने का मंगलसूत्र। हमने एक संस्था से चर्चा की तो फौरन उन्होंने हामी भरी। न सिर्फ सोने का मंगलसूत्र बल्कि सोने का टॉप्स भी उपलब्ध कराया गया। इंदिरा जैन के बताया, रायपुर की खासियत ये है कि लोग मदद के लिए बहुत जल्दी आगे आते हैं। हमने कुछ लोगों से ही चर्चा की थी लेकिन बहुत सी संस्थाएं आगे आ गईं। मुझे लगता है इस मामले में हमारा रायपुर बहुत आगे है।

नो प्लास्टिक जोन

नो प्लास्टिक की मुहिम चलाने वाले श्याम बैरागी ने बताया कि यह शादी नो प्लास्टिक जोन के तहत हुई है। शादी परिसर में एक भी प्लास्टिक का प्रयोग नहीं किया गया। हम इस शादी के माध्यम से प्लास्टिक मुक्त जीवन का संदेश भी देना चाहते थे।

वीरभद्र आसन में डाली वरमाला

योग दिवस को सार्थक बनाने के लिए दूल्हा और दुल्हन ने वरमाला वीरभद्र आसन करते हुए डाली गई। हालांकि पंडितजी ने वरमाला डालने के लिए झुकना जरूरी करार दिया। इसके बाद दोनों से उसी अंदाज में वरमाला डाली।

इन संस्थाओं ने की मदद

सक्षम,लावण्या फाउंडेशन, श्रीवल्लभ प्रेम सेवा समाज ट्रस्ट, गुजराती महिला मंडल बिलासपुर, हरसंभव फाउंडेशन, नवसृजन मंच, भारतीय योग संस्थान, आस एक प्रयास सेवा टोली, प्रांतीय अखंड ब्राह्मण समाज, जिंदगी न मिलेगी दोबारा, मधुधारा संगठन, अनुप्रभा फाउंडेशन, ऑल इंडिया लेडीज क्लब, सर्वमंगल फाउंडेशन, अर्पण महिला मंडल, छत्तीसगढ़ महिला मंच, उमंग, इनरव्हील क्लब, राजकुमार कुकरेजा मेमोरियल सोसायटी