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जग्गी केस में फैसले के बाद बढ़ी मांग, बेटे सतीश बोले- अमित जोगी को मिले फांसी, पासपोर्ट भी हो जब्त

Jaggi Murder Case: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2003 के रामावतार जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी को हत्या और साजिश का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। 23 साल बाद परिवार को मिला न्याय।

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जग्गी केस में फैसले के बाद बढ़ी मांग (photo source- Patrika)

जग्गी केस में फैसले के बाद बढ़ी मांग (photo source- Patrika)

Jaggi Murder Case: साल 2003 के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए लंबे समय से चले आ रहे इस मामले में नया मोड़ ला दिया है। अदालत ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को हत्या और आपराधिक साजिश का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

Jaggi Murder Case: पीड़ित पक्ष ने इसे न्याय की जीत बताया

यह फैसला मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने सुनाया। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत दोष सिद्ध करते हुए अमित जोगी को उम्रकैद की सजा दी, साथ ही 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना अदा न करने पर छह महीने की अतिरिक्त सश्रम कारावास की व्यवस्था भी की गई है।

इस फैसले के बाद पीड़ित पक्ष ने इसे न्याय की जीत बताया है। सतीश जग्गी ने कहा कि करीब 23 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद उनके परिवार को न्याय मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि इस लड़ाई के दौरान उन्हें न केवल राजनीतिक प्रभाव बल्कि आर्थिक ताकत से भी जूझना पड़ा। सतीश जग्गी ने आगे मांग करते हुए कहा कि दोषी को और कठोर सजा—फांसी—दी जानी चाहिए तथा उसका पासपोर्ट भी जब्त किया जाना चाहिए।

क्या था पूरा मामला?

4 जून 2003 को रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वे नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के सक्रिय नेता और प्रदेश कोषाध्यक्ष थे। इस हत्याकांड ने उस समय प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी थी। मामले में कुल 31 आरोपियों को नामजद किया गया था, जिनमें से दो—बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह—सरकारी गवाह बन गए थे।

ट्रायल कोर्ट ने 2007 में 28 आरोपियों को दोषी ठहराया था, लेकिन अमित जोगी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मामले की दोबारा सुनवाई हाईकोर्ट में हुई।

हाईकोर्ट ने क्यों पलटा फैसला?

उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि एक ही गवाही और साक्ष्य के आधार पर कुछ आरोपियों को दोषी ठहराना और कथित मुख्य साजिशकर्ता को बरी कर देना न्यायिक दृष्टि से गलत और असंगत है। इसी आधार पर ट्रायल कोर्ट के 31 मई 2007 के फैसले को निरस्त करते हुए नया निर्णय सुनाया गया।

कौन थे रामावतार जग्गी?

Jaggi Murder Case: रामावतार जग्गी कारोबारी पृष्ठभूमि से जुड़े प्रभावशाली नेता थे और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के करीबी माने जाते थे। जब विद्याचरण शुक्ल ने कांग्रेस छोड़कर NCP का दामन थामा, तो जग्गी भी उनके साथ पार्टी में शामिल हो गए। बाद में उन्हें छत्तीसगढ़ में पार्टी का कोषाध्यक्ष बनाया गया था।

फैसले का असर

करीब दो दशकों से अधिक समय तक चले इस मामले में हाईकोर्ट का यह फैसला न केवल न्यायिक प्रक्रिया की गंभीरता को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि लंबी कानूनी लड़ाई के बाद भी न्याय संभव है। इस निर्णय के बाद राजनीतिक और कानूनी हलकों में भी हलचल तेज हो गई है और इसे एक अहम न्यायिक मील का पत्थर माना जा रहा है।
ये पाए गए थे दोषी

जग्गी हत्याकांड में अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी, अमरीक सिंह गिल, चिमन सिंह, सुनील गुप्ता, राजू भदौरिया, अनिल पचौरी, रविंद्र सिंह, रवि सिंह, लल्ला भदौरिया, धर्मेंद्र, सत्येंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह परिहार, विनोद सिंह राठौर, संजय सिंह कुशवाहा, राकेश कुमार शर्मा, (मृत) विक्रम शर्मा, जबवंत, विश्वनाथ राजभर दोषी पाए गए थे।