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अब नया रायपुर राज्योत्सव स्थल के पास देना होगा धरना, कलेक्टर ने जारी किया शिफ्टिंग का आदेश

Naya Raipur Rajyotsav site: लगभग एक दशक के पश्चात अब आखिरकार बूढ़ातालाब धरना स्थल को नया रायपुर में शिफ्ट कर दिया गया है। अब धरना देने वाले कर्मचारी नया धरना स्थल यानी नवा रायपुर में राज्योत्सव मेले के सामने जाकर धरना देंगे।

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अब नया रायपुर राज्योत्सव स्थल के पास देना होगा धरना

धरना स्थल प्रतीकात्मक तस्वीर

Naya Raipur Rajyotsav site: लगभग एक दशक के पश्चात अब आखिरकार बूढ़ातालाब धरना स्थल(Budhatalab protest site) को नया रायपुर में शिफ्ट कर दिया गया है। अब धरना देने वाले कर्मचारी नया धरना स्थल यानी नवा रायपुर में राज्योत्सव मेले के सामने जाकर धरना देंगे। रायपुर कलेक्टर(Collector Dr. Sarveshwar Narendra Bhure) ने शनिवार की रात शिफ्टिंग का आदेश भी जारी कर दिया। बता दें कि लगभग एक साल पहले तत्कालीन कलेक्टर सौरभ कुमार(Collector Saurabh Kumar) ने भी धरना स्थल इसी जगह पर निर्धारित किया था। फिर इसके बाद नवा रायपुर विकास प्राधिकरण की जमीन पर धरना स्थल बनाने के लिए तैयारियां भी शुरू कर दी गई थी।

लेकिन कलेक्टर ने इस फैसले के साथ छोटे संगठनों को थोड़ी राहत दे दी है। कलेक्टर ने शनिवार को आदेश जारी कर साफ कर दिया है कि बूढ़ा पारा भी धरनास्थल रहेगा। पिछले साल के आदेश की तरह इसमें भी जिक्र है कि यदि धरना-प्रदर्शन में 100 लोग शामिल होंगे तो उनका धरनास्थल बूढ़ा पारा(Budhatalab protest site) ही रहेगा। यदि प्रदर्शनकारियों की संख्या इससे ज्यादा होती है तो उन्हें नवा रायपुर के तूता राज्योत्सव स्थल जाना होगा।

दरअसल, पिछले कुछ दिनों से योजनाबद्ध ढंग से बूढ़ा पारा स्थित धरनास्थल को खाली कराने की कोशिश चल रही थी। इसके लिए पोस्टर लेकर रैली निकाली गई। नगर निगम के सामने नारेबाजी की गई। कलेक्टर पर दबाव बनाने की कोशिश की गई। फिर शुक्रवार को जिला प्रशासन के एक आदेश को सोशल मीडिया में वायरल करवाकर ऐसा माहौल बनाया गया कि धरनास्थल को बूढ़ा तालाब(Budhatalab) से नवा रायपुर(Nava Raipur) शिफ्ट कर दिया गया है। इस बात से कर्मचारी संगठन विरोध में एक और आंदोलन की तैयारी भी करने लगे थे।

इस मामले में डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे, कलेक्टर, रायपुर ने कहा, 100 लोगों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए बूढ़ापारा ही धरनास्थल रहेगा। सौ से अधिक लोगों के लिए तूता में अनुमति दी जाएगी। छह तारीख को होने वाले प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग आ रहे हैं, इसलिए उन्हें माना-तूता में प्रदर्शन की अनुमति दी गई है, क्योंकि बूढ़ा तालाब में जगह कम पड़ जाएगी।

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जब बीच शहर सुनवाई नहीं तो वहां वीराने में कौन सुनेगा
धरनास्थल शिफ्टिंग की साजिश के खिलाफ 26 से ज्यादा कर्मचारी, सामाजिक और राजनीतिक संगठन लामबंद हैं। उनका तक है कि जब शहर के बीच ही उनकी मांगों की सुनवाई नहीं होती है, तो तूता जैसी किसी वीरान जगह में उनकी आवाज कौन सुनेगा। इस संगठनों में सीटू, माकपा, संयुक्त ट्रेड यूनियन काउंसिल, तृतीय वर्ग शासकीय कम.संघ, छग मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स यूनियन, दलित शोषण मुक्ति मंच, संयोजक जन नाट्य मंच रंगकर्मी, इप्टा, छत्तीसगढ़ नाचा थियेटर संघ, शिक्षक संघ, एसएफआइ, जनवादी नौजवान सभा, स्टूडेंट्स फेडरेशन आफ इंडिया, आल इंडिया पोस्टल एम्प्लाइज यूनियन, आदिवासी एकता महासभा, रायपुर डिवीजन इंश्योरेंस एम्प्लाइज यूनियन, बीएसएनएल एम्प्लाइज यूनियन, रेलवे मेल सर्विस यूनियन, केन्द्रीय कर्मचारी पेंशन संघ, आल इण्डिया इंश्योरेंस पेंशनर एसोसियेशन, एसटीयूसी, छत्तीसगढ़ नागरिक संयुक्त संघर्ष समिति, बैंक एम्प्लाइज फेडरेशन आफ इण्डिया, झुग्गी झोपडी एकता संघ आदि शामिल हैं।

जब गाड़ दिए जीई रोड पर तंबू
अभी हाल में ही चौपाटी के विरोध में विपक्षी दल भाजपा नेताओं द्वारा शहर के जीई रोड जैसी जगह पर तंबू गाड़ कर बैठ गए। प्रशासन द्वारा ऐसी जगह धरना-प्रदर्शन के लिए तय नहीं है। फिर भी कई दिनों तक नारेबाजी और सत्तापक्ष के विरोध में भाषणों का दौर चला।

जब चाहे, तब राजीव गांधी चौक में धरना
सबसे व्यस्ततम मोतीबाग रोड पर राजीव गांधी चौक में कांग्रेस कार्यकर्ता, नेता जब चाहे धरना-प्रदर्शन कर सकते हैं। केंद्र सरकार की नीतियों के लिए आवाज बुलंद करते हैं। महंगाई हो बेरोजगारी का मुद्दा। परंतु यह जगह भी धरना-प्रदर्शन के लिए तय नहीं।

जहां पहले देते थे धरना, वहां निगम लगवा रहा दुकानें
काफी समय तक मोतीबाग और राजीव गांधी चौक के ठीक सामने कंकाली जाने वाली रोड के कार्नर खाली जगह में संगठनों के लोग धरना-प्रदर्शन करते रहे। परंतु प्रशासन के दखल और बूढ़ातालाब के पास जगह तय होने के बाद मोतीबाग क्षेत्र में आंदोलन नहीं करने पर संगठनों के नेता मान गए।

जयस्तंभ व शारदा चौक में दोनों तरफ से नारेबाजी
जब सीएए को लेकर देश में विरोध के स्वर उठे थे, तब जयस्तंभ चौक में सीएए के विरोध में तो दूसरी तरफ उसी रोड पर शारदा चौक में हनुमान चालीसा पाठ, नारेबाजी कर सीएए का समर्थन करने वालों की नारेबाजी सुनाई दी। ये दोनों जगह भी किसी तरह के धरना-प्रदर्शन के लिए तय नहीं।

डॉ अजित आनंद डेग्वेकर, निवासी बूढ़ापारा ने कहा, गार्डन नहीं बनाने को लेकर सडक़ से न्यायालय तक लड़ाई लड़ी है, क्योंकि गार्डन बना देने के कारण ही ट्रैफिक जाम जैसे हालत बन रहे हैं। असली दिक्कत सडक़ बंद करने से है।

रामकुमार सिन्हा, महामंत्री दैवेभो वन कर्मचारी संघ ने कहा, बूढ़ातालाब के पास से हटाए जाने का कड़ा विरोध करेंगे। बार-बार जगहें बदली जा रही है। इसके पीछे केवल आवाज दबाने की कोशिशों से अधिक कुछ नहीं है। सभी संगठन एकजुट हैं।

चंद्रशेखर तिवारी, प्रांताध्यक्ष तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ ने कहा, प्रशासन धरना प्रदर्शन बूढ़ातालाब के पास से हटाने का प्रयास न करे। जहां कोई नहीं वहां फेंकने की कोशिशें की जा रही है। बल्कि भीड़ होने पर आउटडोर स्टेडियम को खोल देना चाहिए।

सरिता पाठक, प्रांताध्यक्ष, आंगबाड़ी संयुक्त संघ ने कहा, अपनी मांगों और अधिकारों के लिए धरना प्रदर्शन शहर में न करें तो कहां सुनवाई होगी। हजारों की संख्या में महिलाएं किसी भी वीरान जगह में किसी भी सूरत में नहीं जाएंगी।

संजय तिवारी, छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी महासंघ ने कहा, कमर्चारियों के अधिकारों के हनन के लिए धरनास्थल को नवा रायपुर में शिफ्ट करने की कोशिशें की जा रही है। इसका कड़ा विरोध करेंगे। क्योंकि वहां उनकी कोई सुनवाई नहीं होगी।

माधुरी मृगे, प्रांताध्यक्ष अनुकंपा संघ ने कहा, हमें तीन माह से अधिक धरना प्रदर्शन करते हो गया, लेकिन अभी तक शासन द्वारा कोई पहल नहीं की गई। जब शहर के बीच में ऐसी िस्थति है तो बीरान जगहों में उनकी कौन सुनेगा।

सूरज ठाकुर, प्रवक्ता छत्तीसगढ़ सर्व विभागीय संविदा कर्मचारी संघ ने कहा, संगठन अपने अधिकारियों के लिए प्रदर्शन करते हैं, ताकि समस्या का निराकरण हो। बूढ़ातालाब के पास धरना स्थल सबसे उचित स्थान है। नवा रायपुर में किसी भी हाल में नहीं जाएंगे।

राजनीतिक दलों के लोग शहर में कहीं भी धरने पर बैठ जाएं। टेंट लगाकर प्रदर्शन करने के लिए उतर आएं। उन्हें पूरी छूट है। प्रशासन का रवैया भी उनके लिए अलग होता है। परंतु अपने अधिकारों, मांगों को लेकर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारी-सामाजिक संगठनों और आम जनता के धरनास्थल पर शिफ्टिंग की तलवार लटकती रहती है। उन्हें कभी यहां, कभी वहां शिफ्ट करने के लिए दबाव बनाने से भी कोई परहेज नहीं किया जाता है।

अभी भी निगम अध्यक्ष की कोशिश जारी
जिला प्रशासन के स्पष्ट आदेश के बावजूद नगर निगम अध्यक्ष प्रमोद दुबे की बूढ़ा तालाब से धरना स्थल को हटवाने की कोशिश जारी है। दुबे ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, सांसद सुनील सोनी, शहर के तीनों विधायकों- बृजमोहन अग्रवाल, विकास उपाध्याय और कुलदीप जुनेजा, महापौर एज़ाज़ ढेबर, सभी व्यापारी संगठनों, आम जनता को पत्र लिखकर धरनास्थल हटाने में सहयोग की अपील की है।