
कानन में शेर के पिंजरे के सामने लगाया गया कूलर
raipur/ बिलासपुर. गर्मी का तेवर तीखा हो गया है। वन्य प्राणियों को इससे राहत देने के लिए कानन प्रबंधन ने कूलर व खस लगाए हैं। खस लगाकर इन्हें पानी से सींचने की व्यवस्था की गई है ताकि वन्य जीवों के शरीर का तापमान नियंत्रित रहे। कानन पेंडारी में शेर व तेंदुए के केज में कूलर लगाए गए हैं।
पक्षियों और छोटे जीव जन्तु के लिए खस की व्यवस्था की गई है। सभी बाडों में तीन से चार बार प्रतिदिन पानी का छिडक़ाव किया जाता है।
तेज गर्मी के कारण कानन पेंडारी के वन्य प्राणियों को भी परेशानी हो रही है। इसे देखते हुए कानन प्रबंधन ने सभी वन्य प्राणियों के केज में कूलर, पंखे और खस की व्यवस्था की है। यहां हर साल 10 अप्रैल के बाद वन्य प्राणियों को ठंडी हवा देने की व्यवस्था की जाती है लेकिन इस बार मई महीने में रुक-रुक कर बारिश होने के कारण 15 मई से ठंडी हवा देने का काम शुरू किया गया है। कानन पेंडारी के रेंजर होरेश शर्मा ने बताया कि मांसाहारी वन्य प्राणियों के केज के अन्दर बने रूम में कूलर लगाया गया है।
रेंजर ने बताया शेर और तेंदुआ के लिए 10 कूलर की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा पक्षी के केज में खस लगाया गया है जिसमें प्रतिदिन तीन से चार बार पानी से सींचा जाता है। सबसे ज्यादा पानी मांसाहारी वन्य प्राणियों के केज में डाला जाता है। बाघ और तेंदुआ के केज में पाइप से चार पांच बार पानी डाला जाता है। वहीं चीतल, नील गाय सहित अन्य शाकाहारी वन्यप्राणियों के केज में स्प्रिंक्लर लगाया है जिससे पानी का छिडक़ाव किया जाता है।
पेड़ों का सहारा लेने लगे वन्य प्राणी
गर्मी का असर वन्य प्राणियों में दिखने लगा है। घास मैदान में विचरण करने वाले वन्य प्राणी सांभर केज के बाहर पेड़ के नीचे दिनभर बैठे रहते हैं। दरियाई घोड़ा दिनभर पानी के अन्दर रहता है। शाम होने पर ही पानी से बाहर निकलता है। भालू के बाड़े में पत्तेदार पेड़ अधिक हैं वह धूप तेज होते ही पेड़ पर चढ़ जाता है और शाम होने पर ही नीचे आता है। नील गाय सहित अन्य जानवर दोपहर पेड़ के नीेचे पाए जाते हैं। कानन पेंडारी के अधीक्षक वी के चौरसिया ने बताया कि सूरज ढलने के एक घंटे बाद कूलर की आवश्यता नहीं होती है। कानन पेंडारी में चारों ओर पेड़ पौधे हैं। इसलिए सूरज ढलते ही कानन पेंडारी में ठंड होना चालू हो जाता है।
बचाव के हो रहे उपाय
- गर्मी से वन्य प्राणियों को बचाने के लिए उनके केज में कूलर पंखे और खस की व्यवस्था की है। इसमें प्रतिदिन तीन से चार बार पानी डाला जाता है। -वी के चौरसिया, अधीक्षक, कानन पेंडारी
Published on:
16 May 2020 07:18 pm

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