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मर्जी से न खाएं पेन किलर दवाएं वरना किडनी और लीवर हो जाएंगे खराब, एक्सपर्ट ने भी चेताया

Pain killer tablet : यही नहीं कई बार दिल का दौरा पड़ने की संभावना भी बढ़ जाती है। पेट में अल्सर तक हो जाता है। कई बार पेट में ब्लीडिंग की संभावना बढ़ जाती है। इसके बावजूद न मेडिकल स्टोर व दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है..

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Pain killer Tablet Alert: शरीर में दर्द होने पर लोग मेडिकल स्टोर व किराना दुकान से पेन किलर खरीदकर खा लेते हैं। फिर हर बार ऐसा ही करते हैं। उन्हें पेन किलर खाने की आदत पड़ जाती है। यही आदत उन्हें भारी पड़ जाती है। जरूरत से ज्यादा डोज लेने पर ये दवाएं किडनी व लीवर पर ऐसा दुष्प्रभाव डालता है कि अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आ जाती है। यही नहीं कई बार दिल का दौरा पड़ने की संभावना भी बढ़ जाती है। पेट में अल्सर तक हो जाता है। कई बार पेट में ब्लीडिंग की संभावना बढ़ जाती है। इसके बावजूद न मेडिकल स्टोर व दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है, न लोग इसे खाना बंद कर रहे हैं।

प्रदेश के नए स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने पेन किलर के साइड इफेक्ट को देखते हुए अपनी पहली बैठक में स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को इस दवा को डॉक्टरों के बिना प्रिस्क्रिप्शन दवा बेचने पर रोक लगाने की बात कहनी पड़ी है। आइए समझते हैं कि आखिर स्वास्थ्य मंत्री को ये बात क्यों कहनी पड़ी? पत्रिका ने विशेषज्ञों से बात की तो पता चला कि पेन किलर सबसे ज्यादा किडनी व लीवर को डैमेज करता है।

ये ऐसा डैमेज करता है कि मरीज को डायलिसिस कराने से लेकर किडनी ट्रांसप्लांट व लीवर ट्रांसप्लांट तक की नौबत ला सकता है। दरअसल पेन किलर दवाओं में ऐसे तत्व होते हैं, जो लीवर व किडनी को नुकसान पहुंचाते हैं। सीनियर न्यूरो सर्जन डॉ. राजीव साहू व हिमेटोलॉजिस्ट डॉ. विकास गोयल ने रिसर्च के हवाले से बताया कि पेन किलर्स का ज्यादा डोज ब्रेन पर भी दुष्प्रभाव डाल सकता है। यह डिप्रेशन का कारण भी बन सकती है। ब्लड प्रेशर कम कर सकता है। यही नहीं थकान व कब्ज भी हो सकता है। लोग मर्जी से व धड़ल्ले से पेन किलर खाते हैं। इससे उन्हें बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है।

जांच की जिम्मेदारी ड्रग विभाग पर, नहीं करते कोई कार्रवाई
मेडिकल स्टोर में पिन किलर धड़ल्ले से तो नहीं बिक रही है, इसे बिना प्रिस्क्रिप्शन तो नहीं बेचा जा रहा है, इसकी जांच का जिम्मा ड्रग विभाग का है। यह विभाग स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत आता है। इसके इंस्पेक्टर सामान्यत: जांच पर नहीं निकलते। इन्हें माह में जो सैंपल लेना है, वे भी नहीं ले पाते। इस कारण यह दवा किराना दुकानों पर बिकते हुए मिल जाती है। कानूनन यह गलत है, लेकिन रोकने वाला कोई नहीं है। गांवों में हरी पत्ती के नाम से डाइक्लोविन प्लस नामक पेन किलर दवा धड़ल्ले से बिकती है। इसके कारण कई लोग बीमार होते हुए दिखते हैं।

केस-एक

राजधानी के एक डॉक्टर ने अपनी 70 वर्षीय माता का दर्द कम करने के लिए वोवेरान टेबलेट का चार डोज खिला दिया। हालांकि वे जानते थे कि इसके काफी साइड इफेक्टर है। चार डोज के बाद जब आरएफटी यानी रीनल फंक्शनल टेस्ट करवाया तो क्रिटिनिन 3 मिग्रा तक पहुंच गया। इसका सामान्य स्तर 0.8 से 1.5 मिग्रा होता है।

केस-दो
बालोद की 35 वर्षीय महिला सिरदर्द, बदन दर्द होने पर गांव की दुकान से पेन किलर खरीदकर खा लेती है। लंबे समय तक खाने के बाद उनके शरीर में सूजन आ गया। इससे घबराए परिजन आंबेडकर अस्पताल इलाज कराने पहुंचे। जांच में पता चला कि महिला की किडनी फेल हो चुकी थी। इलाज के कुछ समय बाद उसकी मौत हो गई।

ये सावधानी बरतें
- हल्का दर्द होने पर पेन किलर न लें। अपनी मर्जी से कभी न लें।

- पेन किलर लेने के बाद पेट में दर्द हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।
- प्रेग्नेंसी के दौरान पेनकिलर न लें। पैरासिटामॉल ले सकते हैं।

- हार्ट संबंधी कोई बीमारी है तो डॉक्टर के सलाह से पेन किलर लें।
- बीपी, डायबिटीज, किडनी व लीवर संबंधी बीमारी होने पर अपनी मर्जी से पेन किलर न लें।

- जैसा कि सीनियर पीडियाट्रिशियन डॉ. शारजा फुलझेले व हार्ट सर्जन डॉ. कृष्णकांत साहू ने बताया।

टॉपिक एक्सपर्ट
पेन किलर दवाओं का ज्यादा डोज किडनी व लीवर को नुकसान पहुंचाता है। अस्पताल में ऐसे कई मरीज पहुंचते हैं, जिनका किडनी व लीवर फेल हो चुका होता है। हिस्ट्री पूछने पर दर्द निवारक दवा खाने की बात भी सामने आती है। कभी भी बिना डॉक्टरी सलाह पेन किलर न लें।

डॉ. देवेंद्र नायक, चेयरमैन श्री बालाजी अस्पताल

अस्पताल में ऐसे कई मरीज आते हैं, जिनकी किडनी व लीवर काफी हद तक डैमेज हो जाता है। इसमें न केवल गांव के बल्कि शहरों के मरीज भी होते हैं। उन्हें मर्जी से पेन किलर न खाने की सलाह दी जाती है। कई रिसर्च में पेन किलर के दुष्प्रभाव सामने आ चुके हैं।
डॉ. योगेंद्र मल्होत्रा, प्रोफेसर मेडिसिन, आंबेडकर अस्पताल