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शिक्षा विभाग के अधिकारियों की खुली पोल, शैक्षणिक कैलेंडर पिछड़ा, विद्यार्थियों पर बढ़ा बोझ, पढ़े पूरा मामला

* वार्षिक कैलेंडर का विभागीय अधिकारी नहीं करते पालन .* एक माह के अंतराल में दो परीक्षा, फिर भी अधिकारी कह रहे सब नियमानुसार .

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शैक्षणिक कैलेंडर पिछड़ा, विद्यार्थियों पर बढ़ा बोझ

शैक्षणिक कैलेंडर पिछड़ा, विद्यार्थियों पर बढ़ा बोझ

रायपुर . स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी शैक्षणिक कैलेंडर बनाते हैं, लेकिन उसका नियमानुसार पालन नहीं कर रहे हैं। नियमानुसार पालन नहीं होने से एक माह के अंतराल में छात्र और शिक्षकों को दो इम्तहानों से गुजरना पड़ रहा है, इससे उन पर मानसिक दबाव पड़ रहा है। इन सब अव्यवस्थाओं के बावजूद शिक्षा विभाग के अधिकारी सब नियमानुसार चलने का दावा करते हुए शिक्षकों और छात्रों की समस्याओं से इंकार कर रहे हैं।

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राज्य आकलन परीक्षा अभी पूरी भी नहीं हो पाई थी कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने 9वीं से 12वीं तक के छात्रों की छमाही परीक्षाओं की घोषणा कर दी है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों की माने तो दिसम्बर माह में छमाही परीक्षाओं से छात्रों को गुजरना होगा। पहली से आठवी तक के छात्रों की राज्य आकलन परीक्षा कराने वाले शिक्षक, छमाही परीक्षा की घोषणा सुनकर चिंतित हैं। शिक्षकों का कहना है प्रयोगों के चलते वर्तमान में राज्य आकलन परीक्षा दीपावाली के बाद पूरी होगी। आकलन इम्तहान पूरा करवाने के बाद छमाही परीक्षाओं का प्रश्न पत्र बनाने में शिक्षक व्यस्त हो जाएंगे। व्यस्त होने से छात्रों को पढ़ाने का समय उन्हें नहीं मिलेगा, जिसका सीधा असर छात्रों के परिणाम पर आएगा।

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स्कूली स्तर पर करनी है तैयारी
छमाही परीक्षा की तैयारी जिले के प्राचार्यों को स्कूल स्तर पर करनी है। आकलन परीक्षा के बाद शिक्षक युद्धस्तर पर प्रश्न पत्र का निर्माण करेंगे और उसके छात्रों को छमाही इम्तहान देने के लिए तैयार करेंगे। लगातार इम्तहानों से गुजरने के चलते दर्जनों प्राचार्यों के आवेदन अवकाश के लिए जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पड़े हैं, जिनमें स्वीकृति का हस्ताक्षर अभी नहीं हुआ है।

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वर्सन
वार्षिक कैलेंडर के अनुसार छमाही परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है। राज्य आकलन परीक्षा पहली बार आयोजित हुई है। इसलिए लेटलतीफी हुई है। वार्षिक कैलेंडर का पालन करने से ही परीक्षा लगातार पड़ रही है।
जीआर चंद्राकर, जिला शिक्षा अधिकारी, रायपुर।

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