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तनाव, अधूरी नींद व काम का बोझ होने से बीपी,शुगर से ग्रसित हो रहे कर्मी

45 वर्ष से अधिक उम्र वालों को अधिक परेशानी

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तनाव, अधूरी नींद व काम का बोझ होने से बीपी,शुगर से ग्रसित हो रहे कर्मी

तनाव, अधूरी नींद व काम का बोझ होने से बीपी,शुगर से ग्रसित हो रहे कर्मी

भिलाई. भिलाई इस्पात संयंत्र में करीब 40 फीसदी कर्मचारी हाई बीपी या शुगर या दोनों बीमारी की चपेट में हैं। अब बीएसपी में काम करने वाले ठेका श्रमिक भी इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। संयंत्र कर्मचारी अपना इलाज सेक्टर 9 अस्पताल में करवाते हैं। बीमार लोगों में बीपी या शुगर या दोनों की दवा खाने वाले कर्मचारी ४० फीसदी हैं। कुछ कर्मचारी निजी तौर पर भी अपना इलाज करवाते हैं।
घट रहे कर्मचारी, बढ़ रहा काम का दबाव

भिलाई इस्पात संयंत्र में कर्मियों की संख्या लगातार घट रही है। इससे नियमित कर्मियों पर काम का दबाव बढ़ रहा है। नियमित कर्मियों को अलग-अलग शिफ्ट में जरूरत के मुताबिक बुलाया जा रहा है। इसका असर कर्मियों के सेहत पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों की माने तो तनाव, समय पर भोजन नहीं करना और रात में पूरी नींद नहीं मिलने से इन बीमारियों ने संयंत्र कर्मियों को घेर लिया है। बीएसपी में काम करने वाले 45 साल से अधिक उम्र के कार्मिकों को शुगर और बीपी की शिकायत अधिक है।

शिफ्ट ड्यूटी करने का असर

सेक्टर 9 हॉस्पिटल बीएसपी के डॉ कौशलेंद्र ठाकुर ने बताया कि संयंत्र में शिफ्ट ड्यूटी के दौरान रात की पाली में काम करना कठिन है। सेहत पर इसका गंभीर परिणाम पड़ता है। इतना ही नहीं प्रभाव पारिवारिक व सामाजिक जीवन में भी पड़ता है। लोगों का जीवन संतुलित नहीं रह गया है। इसमें सोना, उठना, खाना, पीना, व्यायाम सब कुछ शामिल है। इस वजह से शरीर को रोगों ने घेर लिया है।


श्रमिकों के हाथ से निकला काम

संयंत्र द्वारा एक निजी कंपनी के माध्यम से श्रमिकों का चिकत्सकीय परीक्षण किया जा रहा है। यह वही कंपनी है जो नियमित कर्मियों का भी जांच कर रही है। उनकी जांच प्रक्रिया के मापदंड में 100 में 60 से भी ज्यादा ठेका श्रमिक मेडिकल अनफिट हो रहे हैं।
एक हजार कर्मचारी हर साल हो रहे रिटायर्ड

बीएसपी से हर साल करीब 1000 कर्मचारी रिटायर्ड हो रहे हैं। उनके स्थान पर नए नियमित कर्मियों की भर्ती नहीं हो रही है। कर्मचारियों पर अतिरिक्त काम का दबाव बढ़ रहा है। उनकी जगह ठेका मजदूरों से काम करवाया जा रहा है। नए मजदूरों को कार्य दिए जाने से नियमित कर्मियों को अपने काम के साथ.साथ उनके कार्य को भी अंजाम देना पड़ता है।घट रहे कर्मचारी बढ़ रहा काम का दबाव