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Engineer’s Day 2022 : हमारे इंजीनियर्स हैं खास क्योंकि यहां सड़क पर ब्लास्ट, हत्या आम

आज इंजीनियर्स डे है और इस रिपोर्ट के जरिए हम बस्तर के इंजीनियर्स के जज्बे की बात कर रहे हैं। बस्तर पूरे देश में एक ऐसा इलाका है जहां विकास की राह आसान नहीं है।

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जगदलपुर। अब तक जितनी भी सरकार प्रदेश में रही उसकी प्राथमिकता बस्तर में सडक़ों का जाल बिछाना रहा ताकि विकास अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। पिछली सरकार में इस पर काफी काम हुआ और मौजूदा सरकार भी इसी उद्देश्य के साथ आगे बढ़ रही है लेकिन बस्तर में सड़क़ों का जाल बिछाना शुरुआत से ही सबसे मुश्किल काम रहा है। इस काम में सबसे बड़ी चुनौती नक्सली हैं। नक्सली सडक़ों के निर्माण का विरोध करते हैं, उनका मानना है कि सडक़ें बनेंगीं तो उनके प्रभाव क्षेत्र तक फोर्स और सरकार का दखल बढ़ेगा। इसलिए वे सडक़ निर्माण के काम को प्रभावित करते रहते हैं। जोखिम व चुनौती के बीच बस्तर के इंजीनियर्स सालों से काम कर रहे हैं। अंदरूनी इलाके तक सडक़ बनाने जुटे हुए हैं।

जान की परवाह किए बगैर अपना मिशन पूरा करते हैं बस्तर के इंजीनियर्स
बस्तर में नक्सली इंजीनियर्स को डराने और काम छोडऩे के लिए मजबूर करते ही रहते हैं। कई बार नक्सली सडक़ और पुल-पुलिया के निर्माण में लगी गाडिय़ों के आग के हवाले कर देते हैं तो कभी नक्सली जिस जगह सडक़ बन रही होती है वहां ब्लास्ट भी करते हैं। आए दिन इस तरह की घटनाएं सामने आती रहती हैं। इसके बावजूद इंजीनियर्स जान की परवाह किए बगैर मिशन में जुटे रहते हैं। कुछ ने बताया कि नक्सली कई बार सीधे साइट तक पहुंच जाते हैं और काम छोडऩे की धमकी देते हैं।

दंतेवाड़ा से जगरगुंडा के बीच तैयार हुई सडक़ को प्रदेश की सबसे खतरनाक सडक़ कहा जाता है। सडक़ इसलिए खतरे और जोखिम से भरी हुई मानी जाती है क्योंकि जब इसका निर्माण हो रहा था तब 100 से ज्यादा आईईडी नकुलनार से अरनपुर के बीच बरामद किए गए थे। यह सडक़ दंतेवाड़ा को सीधे सुकमा जिले से जोड़ देती है। जगरगुंडा को कभी नक्सलियों की राजधानी भी कहा जाता था। यह इलाका सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा की सरहद पर स्थित है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस सडक़ को तैयार करना इंजीनियर्स के लिए कितना जोखिम भरा रहा होगा।

बस्तर में हर कदम पर जोखिम, इसका सामना करना ही हमारा काम
जिस तरह से बस्तर में फोर्स नक्सल उन्नमूलन में जुटी हुई है, उसी तरह से हमारे इंजीनियर्स बस्तर में विकास की राह तैयार करने का काम कर रहे हैं। यह काम आसान नहीं है। बस्तर में हर कदम पर जोखिम है और उसका सामना करना ही हमारा काम है। एनएच के अंतर्गत बस्तर संभाग की जो सडक़ें हैं वह नक्सल प्रभावित इलाकों से होकर भी गुजरती हैं। हमने नक्सल प्रभावित इलाके बीजापुर में कई बड़े पुल का निर्माण करवाया है। इसमें हमारे इंजीनियर्स की भूमिका अहम रही है। हमारी कई महिला इंजीनियर्स भी निडरता और जज्बे के साथ काम कर रही हैं। -आरके गुरु, ईई, एनएच बस्तर