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छत्तीसगढ़ में हर हफ्ते 3-4 मरीज आ रहे हैं ब्रॉड डेड के मामले, इसके पीछे हैं ये प्रमुख कारण

- स्टेट डेथ ऑडिट कमेटी की रिपोर्ट से खुलासा- जनवरी में हर रोज औसतन 12 मौतें हो रहीं

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रायपुर. प्रदेश में कोरोना संक्रमित मरीजों के ब्रॉड डेड (मृत अवस्था में आना) होने के मामले बढ़ते चले जा रहे हैं। हर हफ्ते अस्पतालों की चौखट पर डॉक्टर मरीजों को ब्रॉड डेड घोषित कर रहे हैं। इनमें होम आईसोलेशन में रहने वाले, लक्षण होने के बावजूद जांच करवाने वाले और सैंपल के दौरान गलत नाम-पता बताने वाले लोग शामिल हैं।

स्टेट डेथ ऑडिट कमेटी की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अस्पताल जिम्मेदारियों से बच रहे हैं। बालोद के एक प्रकरण में। कोरोना संक्रमित मरीज को जिला अस्पताल बालोद से मेडिकल कॉलेज राजनांदगांव रेफर किया गया। मेडिकल कॉलेज यानी सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान से हाईटेक हॉस्पिटल रेफर किया गया। वहां से एम्स रायपुर। जहां उसे ब्रॉड डेड घोषित कर दिया गया।

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'पत्रिका' पड़ताल में सामने आया कि हर हफ्ते ब्रॉड डेड के 2-3 प्रकरण सामने आ रहे हैं। इसे लेकर बीते दिनों डेथ ऑडिट कमेटी की बैठक में सभी जिले के नोडल अधिकारी वीडियो कांफे्रसिंग के जरिए जुड़े। कमेटी के अध्यक्ष डॉ. सुभाष पांडेय ने सभी को निर्देशित किया कि होम आईसोलेशन वाले मरीजों पर विशेष ध्यान रखें। नियमों के तहत ही होम आईसोलेशन दिया जाए, इस बात विशेष ध्यान रखें।

ब्रॉड डेड होने के 2 और कारण
1- कोरोना संक्रमित मरीज अस्पताल में 2-3 दिन रूकते हैं, और फिर खुद को होम आईसोलेशन में रहने का आवेदन करते हैं। स्वीकृति भी मिल जाती है। घर पर पूरी देखभाल नहीं होती और स्थिति बिगड़ने पर जब अस्पताल लाए जाते हैं तो देर हो जाती है।
2- नियमानुसार 50 साल से अधिक आयुवर्ग के मरीजों को होम आईसोलेशन की इजाजत नहीं है। बावजूद इसके मिल जाती है। ऐसे कई प्रकरण हैं जिसमें मरीज गंभीर स्थिति में पहुंचे, और मौत हो गई।

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10 घंटे तक एंबुलेंस में मरीज
ऑडिट में यह बात भी सामने आई कि मरीज को 10-12 घंटे तक एंबुलेंस में एक से दूसरे अस्पताल में रेफर करना जोखिम भरा साबित होता है। बीते हफ्ते ऐसे प्रकरण सामने आए। संबंधित जिलों को निर्देश दिए गए हैं कि जिलों में या फिर संभाग स्तर पर ही इलाज के पुख्ता बंदोबस्त हों, ताकि रेफरल की जरुरत न पड़े।

कोरोना डेथ ऑडिट कमेटी के अध्यक्ष डॉ. सुभाष पांडेय ने कहा, निश्चित तौर पर ब्रॉड डेड के मामले बढ़े हैं। इनके कारण तलाशे गए हैं। मैंने सभी जिलों के अधिकारियों से इस संबंध में बात की है। उन्हें डेथ ऑडिट प्रजेंटेशन बनाने को कहा है।