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जबतक इलाज मिल नहीं जाता मास्क ही कोरोना की पहली वैक्सीन, 90 प्रतिशत तक रोकता है संक्रमण

हम सब ने बचाव के तरीके मास्क और सैनिटाइजर का उपयोग किया। और नियमित कर रहे हैं। देखिए, कोरोना संक्रमण कब खत्म होगा यह कोई नहीं बता सकता। मगर, विशेषज्ञ और डॉक्टरों की बात मान ही लेनी चाहिए कि वैक्सीन के बनने तक मॉस्क ही पहली वैक्सीन है।

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रायपुर. जिस तरह से हम रोजाना ब्रश करना नहीं भूलते, खाना खाना नहीं भूलते,कपड़े पहनना नहीं भूलते तो हमें मास्क पहनना भी नहीं भूलना चाहिए। मास्क को हमें अपनी दैनिक आदत का हिस्सा बना लेना चाहिए, क्योंकि यह हमें कोरोना वायरस के संक्रमण के खतरे से 90 प्रतिशत तक बचा सकता है।

माना कोविड-19 अस्पताल के पहले प्रभारी अधीक्षक एवं चिकित्सा शिक्षा संचालनालय में सहायक संचालक के पद पर पदस्थ डॉ. तरुणेश राज बताते हैं, बीते दिनों हमारे एक उच्च अधिकारी कोविड पॉजिटिव पाए गए। स्वाभाविक है कि अधिकारी हैं तो संपर्क में रहेंगे। मगर, उनसे किसी को संक्रमण नहीं फैला क्योंकि हम सब मॉस्क लगाए रहते हैं।

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हम सब ने बचाव के तरीके मास्क और सैनिटाइजर का उपयोग किया। और नियमित कर रहे हैं। देखिए, कोरोना संक्रमण कब खत्म होगा यह कोई नहीं बता सकता। मगर, विशेषज्ञ और डॉक्टरों की बात मान ही लेनी चाहिए कि वैक्सीन के बनने तक मॉस्क ही पहली वैक्सीन है। आप मरीजों से बात करें तो अधिकांश से यही सुनने मिलेगा कि वे नियमित मॉस्क का इस्तेमाल नहीं करते थे।

कोरोना से बचाव के 2 सुझाव

पहला- घर की दहलीज से पैर बाहर निकले तो मॉस्क लगा ही हो, यह सुनिश्चित हो।

दूसरा- अगर, आपको जरा भी सर्दी, जुखाम हो तो घर पर भी मॉस्क लगाकर रहें।

मेरे अनुभव-

जब माना कोविड19 हॉस्पिटल में मरीजों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू हुई तो ने केवल डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल अन्य स्टाफ को घबराहट का सामना करना पड़ा। चूंकि यह हमारे लिए परीक्षा की घड़ी थी मैं और मेरे सहयोगी द्वारा इनकी हिम्मत बढ़ाते हुए अपने स्टाफ को पीपीई किट दी। मरीजों को वार्डों में भर्ती किया। हमने सुरक्षा के सारे नियमों का पालन किया और यही कारण था की हम सब कोविड पॉजिटिव मरीजों के संपर्क में आने के बाद भी संक्रमित नहीं हुए।

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