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शिक्षा का मजाक बनाना आजकल लोगो को आम बात लग रही है। एेसा ही एक मामला है बीटीआई के पूर्व डायरेक्टर का है। जो फर्जी पीएचडी की सर्टिफीकेट लेकर अब शोध निर्देशक बन गया।
भिलाई . खुद की पीएचडी फर्जी होने के बावजूद 10 छात्रों के गाइड बने बीआईटी के पूर्व डायरेक्टर प्रो. एमके कोवर के खिलाफ तकनीकी विश्वविद्यालय(सीएसवीटीयू) ने नेवई में शिकायत दर्ज करा दी है। सोमवार को विवि प्रशासन ने इस मामले की निगरानी के लिए विवि के वरिष्ठ सलाहकार ओपी मिश्रा को प्रभारी नियुक्त किया है। प्रो. कोवर मामले में विवि ने विवि ने लिखित शिकायत देकर कहा है कि इन्होंने कई साल तक विवि को गुमराह किया। फर्जी पीएचडी के जरिए गाइड बने, साथ ही विवि की कई समितियों में भी जगह पाई। विवि ने प्रकरण में जालसाजी व धोखाधड़ी की शिकायत की है।
कब होगी एफआईआर : सीएसवीटीयू प्रशासन की ओर से की गई शिकायत पर अब पुलिस विवेचना करेगी। कोवर की फर्जी पीएचडी सहित तमाम दस्तावेजों की जांच करने के बाद एफआईआर दर्ज होगी। बता दें कि कई साल के बाद सीएसवीटीयू प्रशासन ने इस मामले में निर्णय लिया है। हाल ही में हुई कार्यपरिषद की बैठक में सभी सदस्यों ने सर्व सम्मिति से कोवर के खिलाफ एफआईआर की अनुशंसा की थी। हालांकि शिकायत की इस कार्यवाही में भी विवि को दो महीने का वक्त लगा।
सूत्र बताते हैं कि वह अब भिलाई में नहीं है। कोवर फिलहाल अपने परिवार के साथ मुंबई में सेटल हो गए हैं। कुछ दिनों पहले उन्हें घर की बिक्री के संबंध में भिलाई में देखे जाने की भी बात सामने आ रही है। पुष्टि तो नहीं है, लेकिन कहा जा रहा है कि उन्होंने घर की कीमत करीब 80 लाख रुपए रखी है। जिसका अभी कोई खरीदार नहीं मिला है।
सीएसवीटीयू के कुलपति डॉ. एमके वर्मा ने बताया किप्रो. कोवर ने कई साल तक विवि को गुमराह किया। खुद के पास पीएचडी नहीं होने के बावजूद दूसरों के गाइड बनें। हमने उनके खिलाफ नेवई थाने में जालसाजी व धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया है।
नेवई के थाना प्रभारी विनय सिंह नेकहा कि मामले की शिकायत मिली है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर एफआईआर दर्ज होगी।
Published on:
06 May 2018 04:04 pm
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