
रायपुर। बिहार से आयुर्वेदिक और यूनानी चिकित्सा पद्धति की फर्जी डिग्री लाकर प्रेक्टिस करने वाले तीन डॉक्टरों का पंजीयन निरस्त किया गया है। तीनों नें छत्तीसगढ़ आयुर्वेदिक तथा यूनानी चिकित्सा पद्धति एवं प्राकृतिक चिकित्सा बोर्ड में फर्जी दस्तावेज देकर धोखे से पंजीयन करा लिया था। रजिस्ट्रार डॉ. संजय शुक्ला नें तीनों डॉक्टरों के द्वारा पंजीयन के समय जमा की गई डिग्री और मार्कशीट का वेरीफिकेशन कराया। जिसमें यह फर्जीवाड़ा का खुलासा हुआ। तीनों नें बिहार के बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर, पटना (बिहार) से जारी बीएएमएस की अंकसूचियां एवं डिग्री जमा की थी। रजिस्ट्रार नें उक्त विश्वविद्यालय से तीनों फर्जी डॉक्टरों की डिग्री की जानकारी मांगी गई। जिसपर विश्व विद्यालय नें तीनों की डिग्री नहीं जारी करने की जानकारी दी। डॉ. संजय शुक्ला ने बताया उक्त पंजीकृत चिकित्सकों के शैक्षणिक दस्तावेज फर्जी होने की सूचना प्राप्त होने पर बोर्ड द्वारा गठित सुनवाई समिति के समक्ष चिकित्सकों को पक्ष प्रस्तुत करने के लिए अवसर दिया गया था। सुनवाई समिति के समक्ष दो चिकित्सकों ने उपस्थित होकर अपना पक्ष रखा किन्तु एक चिकित्सक को बार-बार सूचना भेजने के बावजूद उन्होंने अपना पक्ष नहीं रखा। इसके बाद तीनों का पंजीयन निरस्त कर दिया है।
कानूनी कार्रवाई की अनुशंसा
पंजीयन निस्त होने के बाद भी यदि ये डॉक्टर प्रेक्टिस करते पाए गए तो उन पर कार्रवाई के लिए बोर्ड की ओर से जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर को भी पत्र लिखा गया है। बोर्ड नें पत्र लिखकर कहा है कि सीएमएचओ द्वारा नर्सिंग होम एक्ट के तहत सभी होम्योपैथिक, यूनानी और आयुर्वेद चिकित्सकों के क्लिनिंग पंजीकृत किया जाए। जिससे फर्जीवाड़ों पर कार्रवाई हो सके।
इन पर हुई कार्रवाई
बोर्ड में पंजीकृत आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. गोविन्द राम चन्द्राकर (ग्राम-हनौदा, दुर्ग), डॉ. अजय कुमार जंघेल (ग्राम-पंडरिया, राजनांदगांव) एवं डॉ. खगेश्वर वारे (ग्राम-हिरी, सारंगढ़-रायगढ़) के शैक्षणिक दस्तावेज संबंधित विश्वविद्यालयों से कूटरचित होने की सूचना प्राप्त होने पर पंजीयन प्रमाणपत्र छत्तीसगढ़ आयुर्वेदिक, यूनानी तथा प्राकृतिक चिकित्सा व्यवसायी अधिनियम, 1970 के धारा 19(1)(घ) एवं धारा 29(1)(ग) के तहत निरस्त कर दिया गया है।
छत्तीसगढ़ राज्य में पंजीकृत ऐसे होम्योपैथिक, यूनानी और आयुर्वेद चिकित्सक जिन्होंने दूसरे राज्यों से डिग्री लिया है, और उनके विश्वविद्यालयों से सत्यापन नहीं हुआ है। उनके शैक्षणिक दस्तावेजों को बोर्ड द्वारा सत्यापन करवाया जा रहा है। जिन चिकित्सकों की डिग्रियां फर्जी पायी जाएगी। उनका पंजीयन बोर्ड के अधिनियमों के तहत निरस्त किए जाएंगे।
- डॉ.संजय शुक्ला, रजिस्ट्रार, छत्तीसगढ़ आयुर्वेदिक तथा यूनानी चिकित्सा पद्धति एवं प्राकृतिक चिकित्सा बोर्ड
Published on:
06 Mar 2022 05:51 pm
बड़ी खबरें
View Allरायपुर
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
