
अलवर/रायपुर. खाने में फल व पानी की जगह गंगाजल पीने वाले फलाहारी बाबा को अब गंगाजल भूलकर जेल का पानी पीना पड़ रहा है। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर की युवती के यौन शोषण के आरोप में न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजे गए फलाहारी बाबा का केन्द्रीय कारागार में पहला दिन काफी कष्टप्रद निकला। बाबा के गंगाजल मांगने पर जेल प्रशासन ने उन्हें जेल मैन्युअल का हवाला देकर लोटा थमा दिया। शनिवार शाम 4 बजकर 25 मिनट पर जेल में प्रवेश करने के बाद जेल प्रशासन ने वैसे तो सुरक्षा की दृष्टि से बाबा को जेल के वार्ड नम्बर-1 की बैरक में ठहराया, लेकिन इस बैरक में पूरी रात बाबा करवटें बदलते रहे।
लग्जरी गाड़ी, मोटे-मोटे गद्दों एवं आलीशान कमरों में रहने व सोने वाले बाबा को जेल में रात बिताने के लिए धरती और सिर छिपाने के लिए कम्बल मिला। जेल में पूरी रात बाबा कभी बैरक की दीवारों तो कभी दरवाजे को निहारते रहे। सोने का प्रयास किया तो मच्छर दुश्मन बन गए। जैसे-तैसे रात करीब 11. 30 बजे बाबा ने कम्बल ओढ़ सोने का प्रयास किया तो गर्मी व हिचकोले खाते पंखें से नींद नहीं आई और पूरी रात बाबा ने करवटें बदल-बदल कर काटी। सुबह बाबा चिंतित मुद्रा में कुछ देर वार्ड के चबूतरे व उसके आस-पास भी घूमे। इस दौरान उन्होंने साथी बंदियों से पूछा कि इस केस में क्या होता है? इस पर बंदियों ने बताया कि ऐसे केस में आजीवन कारावास की सजा भी हो सकती है। इतना सुनते ही बाबा फिर से चिंतामग्न हो गए।
सुबह गिनती में शामिल हुए बाबा
रविवार सुबह 4 बजे ही बाबा जाग गए। बैरक का दरवाजा नहीं खुलने पर वे लेटे-लेटे ही कभी छत तो कभी दरवाजे की ओर झांकते रहे। इस दौरान उनके कुछ साथी बंदी भी जाग गए, जिनसे बाबा ने पूछा कि जेल (बैरक) कब खुलेगी? इस पर साथी बंदियों ने बताया कि सुबह करीब ६ बजे गिनती के समय दरवाजा खुलेगा। सुबह गिनती में बाबा भी अन्य बंदियों के साथ शामिल हुए।
साथी बंदियों ने खिलाए दो केले
हर बार आरती के बाद श्रद्धालुओं को बदल-बदल कर प्रसाद देने वाले फलाहारी को जेल में बंदियों से मांगकर केले खाने पड़े। सूत्रों के अनुसार जेल में शनिवार शाम को बाबा ने खाना नहीं खाया। जेल प्रशासन के अनुरोध के बाद भी बाबा के खाना नहीं खाने पर जेल में नवरात्र कर रहे बंदियों ने बाबा को केले दिए। पहले तो बाबा ने मना कर दिया, लेकिन बाद में एक बंदी से दो केले लेकर खा लिए।
Published on:
25 Sept 2017 03:57 pm
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