
Tomato Farming From Israeli method: अंबिकापुर. सरगुजा जिले में किसान (New technique) नई-नई तकनीक से सब्जियों की खेती कर रहे हैं। पद्धति भी ऐसी जिससे आय तो दोगुनी हो ही रही है, कम रकबे में फसल का उत्पादन भी बढ़ा है। ऐसी ही तकनीक का उपयोग सरगुजा के किसान अब (Tomato Farming) टमाटर की फसल पर कर रहे हैं। अमूमन टमाटर के पौधे की ऊंचाई 3 से 4 फीट के बीच होती है लेकिन नए वैज्ञानिक तरीके से यहां के किसान 6-8 फीट के टमाटर के पौधे तैयार कर रहे हैं। इसमें काफी मात्रा में फल भी लद रहे हैं। एक पौधे से करीब 22-27 बार तोड़ाई हो रही है।
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इसे बेचकर किसान हर वर्ष लाखों रुपए की कमाई कर रहे हैं। अंबिकापुर के डिगमा निवासी युवा किसान प्रतीक बनिक इजरायली पद्धति से टमाटर की खेती कर रहे हैं। पत्रिका से चर्चा के दौरान इन्होंने बताया कि पहले वे निजी कंपनी में काम करते थे लेकिन जब इन्हें पता चला कि टमाटर की खेती में मोटा मुनाफा है तो नौकरी छोड़कर खेती में लग गए। युवा किसान ने बताया कि वे पिछले 3 साल से डिगमा में ढाई एकड़ में टमाटर की फसल लगा रहे हैं। वे टमाटर के जो पौधे लगा रहे हैं उसकी ऊंचाई 6-8 फीट होती है। उन्होंने बताया कि सामान्य रूप से टमाटर के पौधे से एक फसल में 12-15 बार तोड़ाई होती है लेकिन इनके द्वारा तैयार टमाटर के पौधे से 22-27 बार तोड़ाई होती है।
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प्रति एकड़ एक लाख का खर्च
युवा किसान ने बताया कि उक्त पद्धति से टमाटर की खेती करने से उत्पादन के साथ आय भी दोगुनी हो गई है। उन्होंने बताया कि प्रति एकड़ टमाटर की खेती करने में करीब 1 लाख रुपए का खर्च आता है। उन्होंने इस वर्ष अब तक 12 बार टमाटर की तोड़ाई की है। वे करीब 5 लाख रुपए का टमाटर बेच चुके हैं। युवा किसान प्रतीक ने बताया कि टमाटर की फसल को वे थोक व्यापारियों को बेचते हैं। सूरजपुर जिले के सिलफिली में सरगुजा संभाग की सबसे बड़ी थोक मंडी है। यहां उत्तरप्रदेश, झारखंड, मध्यप्रदेश, बिहार व ओडिशा के थोक व्यापारी आकर टमाटर ले जाते हैं।
Published on:
24 Nov 2022 01:10 pm
