
फसल अमृत
रायपुर। Chhattisgarh News: राज्य के खैरागढ़ में स्थित मनोहर गोशाला में गोमूत्र से प्राकृतिक तरीके से फसल अमृत का निर्माण किया जा रहा है। साथ ही इसका नि:शुल्क वितरण किसानों को किया जाता है। सामान्य शब्दों में इस गोमूत्र खाद का परीक्षण इन दिनों इंदिरा गांधी कृषि विवि के वैज्ञानिक कर रहे हैं। इसकी पहली रिपोर्ट वैज्ञानिकों ने गोशाला के मैनेजिंग ट्रस्टी अखिल जैन (पदम डाकलिया) को सौंप दी है।
विवि के वैज्ञानिकों ने रिपोर्ट में बताया है कि दाऊ वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विवि दुर्ग, अंजोरा में गोमूत्र से निर्मित फसल अमृत का प्रयोग ग्रीष्म कालीन धान, गोभीय वर्गीय और भिण्डी की फसल पर फील्ड ट्रायल किया गया। गोभीय वर्गीय में फूलगोभी और पत्तागोभी शामिल रहे। इस दौरान फसलों के उत्पादन में 10 से 12 प्रतिशत की अधिक उपज प्राप्त हुई। वहीं धान में 25 प्रतिशत रासायनिक खाद का उपयोग कम हुआ।
8-10 प्रतिशत बढ़ा गोभी का उत्पादन
अखिल जैन ने बताया, रबी फसल वर्ष 2022-23 के दौरान गोभीय वर्गीय फसलों में गोशाला की तरफ से निर्मित फसल अमृत का प्रयोग किया गया, जिसमें उर्वरकों के साथ फसल अमृत का छिड़काव किया गया। यह छिड़काव पहली बार फसल की बोनी के 20-25 दिन में और दूसरी बार 35-40 दिन में किया गया। वैज्ञानिकों के अनुसार पत्तागोभी और फूलगोभी की 8-10 प्रतिशत अधिक उपज प्राप्त हुई। वहीं, भिण्डी की फसल पर अनुशंसित रासायनों के साथ फसल अमृत के 10 प्रतिशत घोल का छिड़काव तीन बार किया गया। भिंडी का उत्पादन फसल अमृत के साथ 12 प्रतिशत बढ़ा।
धान में 25 फीसदी कम हुआ रासायनिक खाद का उपयोग
फसल अमृत का परीक्षण ग्रीष्म कालीन धान की फसल में भी किया गया। फसल की बोनी के पूर्व कन्हार व मटासी मिट्टी में इसका छिड़काव किया गया। इस दौरान 75 प्रतिशत अनुशंसित खाद के साथ 40 मिली लीटर फसल अमृत बोनी के समय मिट्टी में किया गया। इस प्रकार फसल अमृत के प्रयोग से 25 फीसदी रासायनिक खाद की बचत हुई।
जैविक कृषि का फायदा पहुंचाना लक्ष्य
गोशाला के मैनेजिंग ट्रस्टी का कहना है कि जिस तरह की जानकारी कृषि विवि की शोध रिपोर्ट में सामने आई है। इससे उनके मनोबल में वृद्धि हुई है। आने वाले समय में फसल अमृत का उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ प्रत्येक किसानों तक नि:शुल्क पहुंच को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे आने वाली पीढि़यों को ऑर्गेनिक फसलों से मुक्ति दिलाने के साथ ही जैविक कृषि के माध्यम से उत्पादित फसलें मिल सके। यह गोशाला प्रबंधन के लिए एक बड़ा लक्ष्य होगा।
Published on:
13 Oct 2023 10:55 am
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