
खाद की किल्लत : टूट रहा अन्नदाता का सब्र
रायपुर. खाद संकट की कमी से जूझ रहे प्रदेशभर के किसानों का सब्र अब जवाब देने लगा है। सोसाइटियों में खाद की कमी के लिए किसान खेती-किसानी का काम सही तरीके नहीं कर पा रहे हैं। इससे नाराज किसानों को अब सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करना पड़ रहा है। दरअसल, भारत सरकार द्वारा 13 लाख 70 हजार मीट्रिक टन उर्वरक की आपूर्ति की स्वीकृति दी गई है, जिसके विरुद्ध लगभग 5 लाख 88 हजार 73 मीट्रिक टन रासायनिक उर्वरक की आपूर्ति की गई है। इसकी वजह से खाद का संकट बना हुआ है। किसानों को सबसे ज्यादा दिक्कत डीएपी की कमी के कारण हो रही है।
इधर, सीएस ने संभाला मोर्चा, हर दिन समीक्षा के निर्देश
खाद की कमी को देखते हुए मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने स्वयं मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने खाद की उपलब्धता को लेकर सोमवार को वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक ली। उन्होंने सहकारी समितियों को हर दिन खाद की समीक्षा करने के निर्देश दिए है। साथ ही कृषि विभाग, मार्कफेड और अपेक्स बैंक को नियमित निगरानी करने को कहा है। उन्होंने कहा, किसी रासायनिक खाद की कमी के कारण फसल उत्पादन प्रभावित ना हो इसके लिए उसके विकल्प के रूप में अन्य खाद भी पर्याप्त मात्रा में सोसाइटी में उपलब्ध हो।
राजनांदगांव : 32 गांवों के किसानों ने ठप किया चौकी-मोहला स्टेट हाइवे
राजनांदगांव/कौड़ीकसा. लगातार खाद की मांग कर रहे 32 गांवों के आक्रोशित किसानों ने चौकी-मोहला मुख्य मार्ग पर स्टेट हाइवे पर उतर कर 4 घंटे तक चक्का जाम किया। किसानों ने खाद न मिलने पर शुक्रवार को दोबारा धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी है। वनांचल के कौड़ीकसा सेवा सहकारी समिति के अंतर्गत आश्रित किसानों को खाद नहीं मिलने से उनका सब्र टूट गया। प्रशासन की ओर से चौकी तहसीलदार प्रीति लारोकर धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलित किसानों को समझाने का प्रयास किया। समिति प्रबंधक ने बताया कि एक हजार बोरी खाद है, उनको व्यवस्था के तहत वितरण कर दिया जाएगा। आंदोलित किसानों का कहना था कि किसानों को प्रर्याप्त मात्र में खाद नहीं मिल पा रहा है। वहीं निजी कृषि केन्द्र व रासायनिक खाद विक्रेताओं के पास प्रार्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध है।
दुर्ग : खेती पिछडऩे का खतरा
दुर्ग .पूरे दुर्ग संभाग में खाद की कमी बनी हुई है। किसानों को सबसे अधिक परेशानी डीएपी खाद को लेकर है। दुर्ग के अलावा राजनांदगांव, कवर्धा, बालोद और बेमेतरा में भी दोनों खाद की खराब स्थिति है। इन जिलों की 90 फीसदी सोसायटियों में पोटाश और डीएपी नहीं मिल रही है। वहीं यूरिया का भी स्टॉक कम है। खाद की कमी से खेती-किसानी का काम पिछडऩे लगा है।
बिलासपुर-सरगुजा संभाग : सोसाइटियों के चक्कर लगा रहे किसान
बिलासपुर-सरगुजा संभाग के सभी जिलों में खाद की कमी से किसान त्रस्त हैं। कोरबा, रायगढ़, कोरिया, जांजगीर-चांपा और जशपुर, सरगुजा और बलरामपुर-रामानुजगंज में खाद की कमी बनी हुई है। ज्यादातर जिलों में सोसायटी में डीएपी का संकट बना हुआ है। वहीं कृषि विभाग का दावा है कि सोसायटी में पर्याप्त खाद की आपूर्ति की गई है, लेकिन किसानों को समय पर खाद नहीं मिल रही है। इस कारण किसानों को खेती का काम छोड़कर सोसायटी का चक्कर काटना पड़ रहा है।
Published on:
28 Jun 2022 12:12 am
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