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छत्तीसगढ़ में बाघों की सुरक्षा में बड़ी लापरवाही, उदंती टाइगर रिजर्व में मिली एक और बाघ की खाल

मैं इस बारे में अभी कुछ नहीं बता पाऊंगा।

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CG News

छत्तीसगढ़ में बाघों की सुरक्षा में घोर लापरवाही, उदंती टाइगर रिजर्व में मिला एक और बाघ की खाल

गरियाबंद. उदंती टाइगर रिजर्व के कुल्हाड़ी घाट क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कुकनार में एक और वन्य जीव के शिकार होने की जानकारी मिली है। वन विभाग की टीम ने एक आरोपी को वन्य जीव के दांत, खाल और बाल के अवशेष के साथ गिरफ्तार किया है। आगे की कार्रवाई के लिए गरियाबंद लाया गया है। मामले में डीएफ ओ विवेकानंद रेड्डी ने बताया कि जांच अभी प्रक्रिया में है। मैं इस बारे में अभी कुछ नहीं बता पाऊंगा।

ज्ञात हो कि उदंती सीतानदी बाघ संरक्षित क्षेत्र छत्तीसगढ़ में बाघों के लिए संरक्षित आवास क्षेत्र है। इसकी स्थापना वर्ष 2008-09 में हुई है। यह 1842-54 वर्ग किमी वन क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां लगातार शिकार होने और बाघ के लापता हो जाने प्रमाण मिल रहे हैं। यह हम नहीं वन विभाग द्वारा ट्रैपिंग के लिए लगाए गए कैमरे बोल रहे हैं। विभाग द्वारा 2016-17 में लगाए गए 200 में से एक भी कैमरा ट्रेप में बाघ की मौजूदगी का एक भी सबूत वन विभाग के हाथ नहीं लगा है। फरवरी में मैनपुर में तस्करों से बाघ की एक खाल मिली थी, माना जा रहा कि ये इन्हीं जोड़ों में से एक की थी। अगर ऐसा हुआ है तो फिलहाल इस रिजर्व से बाघों की मौजूदगी शून्य हो गई है। गणना के लिए इस साल लगाए गए 200 कैमरों में से एक में भी यहां बाघ की मौजूदगी के सबूत नहीं मिले हैं।

14 फरवरी को हुई थी कार्रवाई
उदंती और सीतानदी अभयारण्य को मिलाकर टाइगर रिजर्व बनाए जाने से पहले सीतानदी अभयारण्य में 2005 तक 4 से 5 बाघ मौजूद थे। इसकी पुष्टि वन विभाग की वन्य प्राणी गणना में भी होती रही है। बाद में एक-एक कर सारे बाघों का शिकार हो गया। इसके बाद 2-3 साल पहले ही ओडिशा के सीमावर्ती जंगल से बाघ के एक जोड़े ने यहां आकर अपना ठिकाना बनाया था। यह जोड़ा भी शिकारियों की भेंट चढ़ गया। कुल्हाड़ीघाट रेंज के सोनाबेड़ा जंगल में पिछली गणना में जो बाघ मिले थे। बीते वर्ष इनका शिकार हो गया। गरियाबंद पुलिस ने बाघ की खाल बेचने की फिराक में घूम रहे ग्राम कुकरार निवासी मेघनाथ नेताम और जरंडी निवासी कंवल सिंह नेताम को बीते 14 फरवरी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। आरोपियों ने पुलिस पूछताछ में खाल के लिए सोनाबेड़ा जंगल में शेर का शिकार करने की बात कबूल की थी।

2004 से अब तक नहीं दिखा एक भी बाघ
उदंती और सीतानदी वाइल्ड लाइफ सेंचुरी को मिलाकर टाइगर रिजर्व बनाए जाने से पहले सीतानदी वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में 2005 तक करीब पांच बाघ हुआ करते थे, लेकिन आज हालत ये है कि यहां के जंगल से बाघों का सफाया हो चुका है। बावजूद इसके करोड़ों रुपए का बजट स्थानीय प्रशासन हर साल खर्च करने का दावा कर रहा है। सबसे बड़ा सवाल जिसका जवाब इन अधिकारियों के पास भी नहीं है वह यह है कि खर्च आखिर हो कहा रहा है, और किस पर हो रहा है। अथॉरिटी एनटीसीए ने 2009 में उदंती सीतानदी सेंचुरी को टाइगर रिजर्व घोषित किया था। तब से अब तक इस जंगल के संरक्षण एवं वन्य प्राणियों की सुरक्षा के नाम पर 13 करोड़ की रकम खर्च हो चुकी है। उदंती में 2004 के बाद से अब तक बाघ देखा नहीं गया है। बस उसकी मौजूदगी के दावे ही होते रहे हैं।

इस वर्ष नहीं मिले मौजूदगी के सबूत
बाघों की गणना के काम से जुड़े एनटीसीए के लोगों का कहना है कि उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में इस वर्ष एक भी बाघ कैमरे में नहीं दिखे हैं। न ही अन्य माध्यमों से इसकी मौजूदगी के पुख्ता सबूत मिले हैं। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष तक देखे गए बाघ के जोड़े का शिकार हो चुका है। आरोपियों को गरियाबंद पुलिस जेल भेजा गया है।