
दिनेश यदु@रायपुर. भारत को ब्रिटिश हुकूमत से आजाद कराने के लिए जिस महात्मा गांधी ने सर्वस्व न्यौछावर कर दिया, राजधानी के आजाद चौक में स्थित उनकी 53 साल पहले लगाई गई प्रतिमा का चश्मा बीते कुछ महीनों से गायब है। यह वहीं कांच का गोल चश्मा है जिसे सरकार ने ‘स्वच्छ भारत’ का नाम का अभियान चलाकर उसके प्रतीक चिन्ह के रूप में अपनाया है। इतना ही नहीं इस प्रतिमा के आसपास गांधीजी के जीवन से संबंधित प्रतिमाएं लगाई गई है, लेकिन उसमें भी बापू को बिना चश्मे के ही दिखाया गया है।

दिनेश यदु@रायपुर. भारत को ब्रिटिश हुकूमत से आजाद कराने के लिए जिस महात्मा गांधी ने सर्वस्व न्यौछावर कर दिया, राजधानी के आजाद चौक में स्थित उनकी 53 साल पहले लगाई गई प्रतिमा का चश्मा बीते कुछ महीनों से गायब है। यह वहीं कांच का गोल चश्मा है जिसे सरकार ने ‘स्वच्छ भारत’ का नाम का अभियान चलाकर उसके प्रतीक चिन्ह के रूप में अपनाया है। इतना ही नहीं इस प्रतिमा के आसपास गांधीजी के जीवन से संबंधित प्रतिमाएं लगाई गई है, लेकिन उसमें भी बापू को बिना चश्मे के ही दिखाया गया है।

दिनेश यदु@रायपुर. भारत को ब्रिटिश हुकूमत से आजाद कराने के लिए जिस महात्मा गांधी ने सर्वस्व न्यौछावर कर दिया, राजधानी के आजाद चौक में स्थित उनकी 53 साल पहले लगाई गई प्रतिमा का चश्मा बीते कुछ महीनों से गायब है। यह वहीं कांच का गोल चश्मा है जिसे सरकार ने ‘स्वच्छ भारत’ का नाम का अभियान चलाकर उसके प्रतीक चिन्ह के रूप में अपनाया है। इतना ही नहीं इस प्रतिमा के आसपास गांधीजी के जीवन से संबंधित प्रतिमाएं लगाई गई है, लेकिन उसमें भी बापू को बिना चश्मे के ही दिखाया गया है।

दिनेश यदु@रायपुर. भारत को ब्रिटिश हुकूमत से आजाद कराने के लिए जिस महात्मा गांधी ने सर्वस्व न्यौछावर कर दिया, राजधानी के आजाद चौक में स्थित उनकी 53 साल पहले लगाई गई प्रतिमा का चश्मा बीते कुछ महीनों से गायब है। यह वहीं कांच का गोल चश्मा है जिसे सरकार ने ‘स्वच्छ भारत’ का नाम का अभियान चलाकर उसके प्रतीक चिन्ह के रूप में अपनाया है। इतना ही नहीं इस प्रतिमा के आसपास गांधीजी के जीवन से संबंधित प्रतिमाएं लगाई गई है, लेकिन उसमें भी बापू को बिना चश्मे के ही दिखाया गया है।

दिनेश यदु@रायपुर. भारत को ब्रिटिश हुकूमत से आजाद कराने के लिए जिस महात्मा गांधी ने सर्वस्व न्यौछावर कर दिया, राजधानी के आजाद चौक में स्थित उनकी 53 साल पहले लगाई गई प्रतिमा का चश्मा बीते कुछ महीनों से गायब है। यह वहीं कांच का गोल चश्मा है जिसे सरकार ने ‘स्वच्छ भारत’ का नाम का अभियान चलाकर उसके प्रतीक चिन्ह के रूप में अपनाया है। इतना ही नहीं इस प्रतिमा के आसपास गांधीजी के जीवन से संबंधित प्रतिमाएं लगाई गई है, लेकिन उसमें भी बापू को बिना चश्मे के ही दिखाया गया है।

दिनेश यदु@रायपुर. भारत को ब्रिटिश हुकूमत से आजाद कराने के लिए जिस महात्मा गांधी ने सर्वस्व न्यौछावर कर दिया, राजधानी के आजाद चौक में स्थित उनकी 53 साल पहले लगाई गई प्रतिमा का चश्मा बीते कुछ महीनों से गायब है। यह वहीं कांच का गोल चश्मा है जिसे सरकार ने ‘स्वच्छ भारत’ का नाम का अभियान चलाकर उसके प्रतीक चिन्ह के रूप में अपनाया है। इतना ही नहीं इस प्रतिमा के आसपास गांधीजी के जीवन से संबंधित प्रतिमाएं लगाई गई है, लेकिन उसमें भी बापू को बिना चश्मे के ही दिखाया गया है।

दिनेश यदु@रायपुर. भारत को ब्रिटिश हुकूमत से आजाद कराने के लिए जिस महात्मा गांधी ने सर्वस्व न्यौछावर कर दिया, राजधानी के आजाद चौक में स्थित उनकी 53 साल पहले लगाई गई प्रतिमा का चश्मा बीते कुछ महीनों से गायब है। यह वहीं कांच का गोल चश्मा है जिसे सरकार ने ‘स्वच्छ भारत’ का नाम का अभियान चलाकर उसके प्रतीक चिन्ह के रूप में अपनाया है। इतना ही नहीं इस प्रतिमा के आसपास गांधीजी के जीवन से संबंधित प्रतिमाएं लगाई गई है, लेकिन उसमें भी बापू को बिना चश्मे के ही दिखाया गया है।