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राज्यसभा के लिए गिरीश देवांगन का नाम लगभग तय, विनोद-करुणा भी दावेदारों में

छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। दो दिनों में किसी ने नामांकन पत्र नहीं खरीदा है। विधायकों की संख्या के आधार पर दोनों सीटें कांग्रेस के खाते में जाने वाली हैं। ऐसे में कांग्रेस ने अपनी तैयारियां कर ली हैं। बताया जा रहा है, एक सीट पर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री गिरीश देवांगन का नाम लगभग तय हो चुका है। राज्यसभा के प्रबलतम दावेदारों में मुख्यमंत्री के सलाहकार विनोद वर्मा का नाम भी है।

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राज्यसभा के लिए गिरीश देवांगन का नाम लगभग तय, विनोद-करुणा भी दावेदारों में

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रायपुर. पूर्व सांसद और पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी की भतीजी करुणा शुक्ला का नाम भी कांग्रेस नेताओं की आंतरिक बातचीत में आ रहा है। हालांकि ऐसी स्थिति तभी बनेगी जब मौजूदा राज्यसभा सांसद मोतीलाल वोरा चुनाव न लड़ें। कहा जा रहा है, अगर वोरा ने चुनाव लडऩे की इ'छा जताई तो उनको दोहराया जा सकता है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि प्रत्याशी तय करने के लिए केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक होली के बाद 11 या 12 तारीख को सकती है। उम्मीदवार की घोषणा 12 मार्च तक हो जाएगी। 13 मार्च को नामांकन का आखिरी दिन है।

इसलिए मजबूत है गिरीश-विनोद का दावा
गिरीश देवांगन: लंबे समय से कांग्रेस के संगठन में काम कर रहे गिरीश देवांगन, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सहपाठी रहे हैं। धनेंद्र साहू के नजदीकी रहे। भूपेश बघेल जब प्रदेश अध्यक्ष बने तो उन्होंने देवांगन को प्रभारी महामंत्री बनाया। कांग्रेस संगठन में गिरीश देवांगन की हैसियत उस समय नंबर-दो की थी।
विनोद वर्मा: राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय समाचार संस्थानों में काम कर चुके विनोद वर्मा, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के रिश्तेदार हैं। भूपेश बघेल के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए वे कांग्रेस से सलाहकार की हैसियत से जुड़े। सोशल मीडिया और दूसरे आधुनिक संचार माध्यमों में कांग्रेस को मजबूत करने के लिए काम किया। अश्लील सीडी कांड में विनोद वर्मा को कई महीनों तक जेल में रहना पड़ा। सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री ने उन्हें अपना सलाहकार बनाया।
इन वर्गों का भी दावा उभरा
राज्यसभा की सीटों को लेकर साहू समाज और सतनामी समाज का दावा उभरा है। सतनामी समाज ने मुख्यमंत्री से मिलकर समाज के किसी व्यक्ति को टिकट देने की मांग की है। पूर्व सांसद पीआर खुंटे भी लॉबिंग कर रहे हैं। वहीं साहू समाज के पास अपने तर्क हैं। उनका कहना था, पिछले राज्यसभा चुनाव में हार तय जानकर भी सरोज पाण्डेय के सामने समाज के लेखराम साहू को टिकट दिया गया था। अब जब जीत तय है तो साहू समाज के किसी नेता को मौका दिया जाना चाहिए। कहा जा रहा है कि साहू समाज किसी महिला का नाम भी आगे बढ़ा सकता है।

एक सीट पर केंद्रीय नेता का नाम
कांग्रेस उन वरिष्ठ नेताओं को संसद में दोबारा भेजना चाहती है, जिनका राज्यसभा में कार्यकाल पूरा हो रहा है। पिछली मुलाकात में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल खुद प्रियंका गांधी को छत्तीसगढ़ से राज्यसभा जाने का प्रस्ताव रख चुके हैं। उनके अलावा, केसी वेणुगोपाल, रणदीप सिंह सुरजेवाला और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का नाम भी सामने आ रहे हैं।

रमन सिंह बोले, भाजपा की कोई संभावना ही नहीं
इधर भाजपा में राज्यसभा चुनाव को लेकर कोई हलचल नहीं है। राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के पारिवारिक समारोह से लौटे पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने शनिवार को कहा, राज्यसभा चुनाव में भाजपा के लिए कहीं से कोई संभावना नहीं है। 14 सदस्य मिलकर किसी को राज्यसभा नहीं भेज सकते। 69 की संख्या वाली कांग्रेस को 2 सीट जिताना आसान है।