
इस बार भाइयों की कलाइयों पर दिखेंगी इको फ्रेंडली राखियां
गरियाबंद। आगामी रक्षाबंधन त्यौहार पर सभी भाइयों की कलाइयों पर इको फ्रेंडली राखियां दिखेगी। गरियाबंद जिला प्रशासन की विशेष पहल से पैरी बंधन के तहत व राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन अंतर्गत जिले की 13 महिला समूहों के द्वारा बांस की कलात्मक राखियां, गोबर, मोती जडि़त राखियों का निर्माण किया जा रहा है। कलेक्टर आकाश छिकारा के मार्गदर्शन में जिले के सभी विकासखण्डों में बड़े व बच्चों की कलात्मक पैरी राखियां का विविध कलाकृतियों के माध्यम से बड़े स्तर पर निर्माण किया जा रहा है। समूह द्वारा सुंदर, आकर्षक व पर्यावरण सुरक्षित राखियों का निर्माण किया जा रहा है।
स्व.सहायता समूह की महिलाओं द्वारा अब तक 7000 राखी निर्माण उपरांत 2 हजार 235 राखियां विक्रय कर कुल 26 हजार 285 रुपए आय प्राप्त किया जा चुका है। महिला स्व.सहायता समूह की दीदियां द्वारा राखी तैयार करने में अनाज, धान, चावल, दालों के अलावा कुमकुम, मौली धागा का उपयोग किया जा रहा है। समूह की दीदियों द्वारा बड़े पैमाने पर रत्नजडि़त, मोती, गोबर, बांस से भी राखी बनाई जा रही है। इन राखियों की जिला कार्यालय गरियाबंद व राजधानी रायपुर तक काफी मांग है। दीदियों ने इस साल लगभग 40 हजार राखियां तैयार करने का लक्ष्य रखा है। रक्षाबंधन के बाद भाई चाहें तो बीजों से बनी राखियों को गमले में लगा सकते हैं। इन बीजों से निकलने वाले पौधे लंबे समय तक भाई-बहन के स्नेह के प्रतीक के रूप में दिखते रहेंगे। महिला स्व.सहायता समूहों को राखी तैयार करने से लेकर बाजार उपलब्ध कराने तक में जिला प्रशासन मदद कर रहा है। इन इको फ्रेंडली राखियों की कीमत 30 रुपए से लेकर 250 रुपए तक है।
Published on:
13 Aug 2023 03:45 pm
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