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खुशखबरी: अब स्मार्ट कार्ड से करा सकेंगे 50 हजार तक का इलाज, जानें क्या हुआ है बदलाव

नए शर्त के अनुसार विभाग ने 30 हजार रुपए का ही टेंडर आमंत्रित किया है।

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रायपुर. स्वास्थ्य बीमा योजना के अंतर्गत प्रदेश में स्मार्ट कार्ड के जरिए प्रत्येक परिवार को इसका लाभ देने और राशि को 30 हजार से बढ़ाकर 50 हजार करने के लिए नियम-शर्तों में बड़ा बदलाव करते हुए टेंडर जारी कर दिया गया है। नए शर्त के अनुसार विभाग ने 30 हजार रुपए का ही टेंडर आमंत्रित किया है, जो कंपनी एल-1 यानी सबसे कम प्रीमियम पर सरकारी मानकों में खरा उतरेगी, उसे ही 50 हजार के स्मार्ट कार्ड के लिए भी वर्कऑर्डर मिल सकेगा। इसके लिए 30 हजार की प्रीमियम राशि में 20 फीसदी का प्रावधान है। जानकारों के अनुसार स्वास्थ्य विभाग, विधि विभाग और मुख्यमंत्री कार्यालय के उच्च अधिकारियों ने टेंडर में 45 दिन की लंबी समीक्षा के बाद शर्त रखी है, ताकि राज्य सरकार को 50 हजार के स्वास्थ्य बीमा की राशि में आर्थिक क्षति न पहुंचे।

30 सितंबर को न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से तीन माह का सरकारी अनुबंध समाप्त हो जाएगा। अनुबंध समाप्त होते ही 1 अक्टूबर से प्रदेशवासियों को स्मार्ट कार्ड से इलाज कराने 30 की जगह 50 हजार रुपए का लाभ मिल सकेगा। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने इस वर्ष तीसरी बार प्रक्रिया शुरू की है। इसके लिए नियम-शर्तों में बड़ा बदलाव करते हुए दूसरी बार टेंडर जारी किया है, अब राज्य सरकार प्रति कार्ड 20 हजार रुपए का अतिरिक्त भार वहन करेगी।

यह रही प्रक्रिया
ज्ञात हो कि 4 जुलाई 2017 को 30 और 50 हजार के कार्ड के लिए टेंडर खोला गया था, जिसमें सबसे कम प्रीमियम दर भरने वाले बजाज फाइनेंस कंपनी को एल-1 की श्रेणी दी गई थी। लेकिन 30 हजार के लिए 332 रुपए और 50 हजार के लिए 882 रुपए के भारी अंतर को देखते हुए वित्त विभाग की आपत्ति के बाद वर्कऑर्डर जारी नहीं जा सका। बहरहाल 30 हजार के स्वास्थ्य बीमा पर एल-1 श्रेणी में आने वाली बीमा कंपनी यदि 500 रुपए तक का प्रीमियम दर भरकर देती है तो उसे 20 हजार रुपए अतिरिक्त यानी 50 हजार के स्वास्थ्य बीमा के लिए 20 फीसदी प्रीमियम दर के हिसाब से ६०० रुपए तक दी जाएगी।

न्यू इंडिया को सर्वाधिक २१ माह का समय मिला
वर्ष 2016 में प्रदेशवासियों को ३० हजार के स्वास्थ्य बीमा का लाभ देने टेंडर निकाला गया था, इसमें न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को 12 माह के लिए 31 दिसंबर तक के लिए वर्कऑर्डर जारी किया गया था। जनवरी 2017 में राज्य सरकार ने 30 हजार की राशि बढ़ाकर 50 हजार करने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा, लेकिन 20 हजार की अतिरिक्त राशि पर केंद्र से सहमति नहीं बन सकी। आनन-फानन में न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से 6 माह का अतिरिक्त अनुबंध करना पड़ा। जून माह में अनुबंध की तिथि समाप्त होने से पूर्व मई 2017 में टेंडर निकाला गया, लेकिन एल-1 की श्रेणी मेें आने के बावजूद बजाज कंपनी से अनुबंध नहीं किया जा सका और टेंडर निरस्त कर दिया गया। इससे एक बार फिर 3 माह के लिए 30 सितंबर 2017 तक अनुबंध बढ़ाना पड़ा। अब सितंबर माह में अनुबंध समाप्त होने से पूर्व 19 सितंबर को नई कंपनी को नए शर्तों के अनुरूप वर्कआर्डर जारी किया जा सकता है।

450 करोड़ के घाटे में बीमा कंपनियां

प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना और मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत स्मार्ट कार्ड के जरिए प्रत्येक परिवार को 30 हजार की राशि उपचार के लिए दी जा रही है। इसमें कई सरकार द्वारा चिन्हित कई निजी अस्पताल, नर्सिंग होम भी स्मार्ट कार्ड से मरीजों का उपचार कर रहे हैं, लेकिन बीमा कंपनियों का कहना है कि अब तक उन्हें छत्तीसगढ़ प्रदेश में 450 करोड़ रुपए का घाटा हो चुका है। वहीं निजी अस्पताल संचालकों का आरोप हैं कि दिसंबर 2016 के क्लेम सहित मई-जून २०१७ तक के ९ करोड़ रुपए भी निर्धारित समयावधि में बीमा कंपनी द्वारा भुगतान नहीं किया गया है। बहरहाल वर्कआर्डर जारी करने से पूर्व बीमा कंपनियों को नए नियम शर्तों का पालन करना होगा।

बदलाव किया गया

लगातार अनुबंध का समय बढ़ाए जाने के बाद अब टेंडर की शर्तों में बदलाव किया गया है। संभवत: 19 सितंबर को टेंडर खोला जा सकता है। केन्द्र सरकार 30 हजार के कार्ड के लिए 60 फीसदी राशि देगी। शेष 20 फीसदी राशि राज्य सरकार को वहन करना पड़ेगा।
विरेंद्र कटरे, अतिरिक्त परियोजना संचालक आरएसबीवाई

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