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अब गूगल छत्तीसगढ़ी में बोलेगा जय जोहार, आने वाला है ये नया फीचर

Chhattisgarhi dialect and language: छत्तीसगढ़ी बोली व भाषा को जानना और समझना लोगों के लिए अब बेहद आसान होने वाला है। तकनीकी तौर पर इसे आसानी से लोगों तक पहुंचाने और विलुप्त हो रही क्षेत्रीय भाषाओं के बचाने लिए दो टीमें काम कर रही है।

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अब गूगल छत्तीसगढ़ी में बोलेगा जय जोहार

अब गूगल छत्तीसगढ़ी में बोलेगा जय जोहार

Chhattisgarhi dialect and language: छत्तीसगढ़ी बोली व भाषा को जानना और समझना लोगों के लिए अब बेहद आसान होने वाला है। तकनीकी तौर पर इसे आसानी से लोगों तक पहुंचाने और विलुप्त हो रही क्षेत्रीय भाषाओं के बचाने लिए दो टीमें काम कर रही है। केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान (सीआईआईएल) मैसूर और भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलूरु की टीम डेटा जुटा रही है। सीआईआईएल की टीम मेंबर सृष्टि सिंह ने बताया अब तक छत्तीसगढ़ी स्पीच एवं टेक्स्ट बुक कलेक्ट किया जा रहा है।

अब तक 1 लाख 50 हजार शब्दों का संग्रह
भारतीय विज्ञान संस्थान देश की 9 भाषाओं को डिजिटल कर रहा है। जिसमें छत्तीसगढ़ी को भी चुना गया है। रविवि के एसोसिएट रिसर्च हितेश तिवारी ने बताया कि अभी तक 2 लाख में से 1 लाख 50 हजार शब्दों का संग्रह किया जा चुका है। वहीं, शब्दों की रिकार्डिंग के लिए 15 लोगों को लिया गया है। चयन के बाद रिकॉर्डिंग होगी। इसके बाद टेक्निकल टीम को हैंडओवर किया जाएगा।

चार जगहों से 10-10 घंटे का रिकॉर्ड
भारतीय विज्ञान संस्थान के इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर प्रशांत कुमार घोष ने बताया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित भाषाओं का तकनीक विकसित की जा रही है। छत्तीसगढ़ी बोली के लिए 11 हजार घंटे की वॉइस रिकॉर्डिंग कराई जा रही है। क्षेत्रीय में सरगुजा, बिलासपुर, रायगढ़, कवर्धा में बोली जाने वाली बोलियों का 10-10 घंटे का वाइस रिकॉर्ड किया जाएगा। इसके साथ ही 10 हजार से ज्यादा टॉपिक पर काम किया जा रहा है।

क्या होगा फायदा
छत्तीसगढ़ी बोली के ग्लोबल होने से सबसे ज्यादा फायदा ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को होगा। खासकर खेती-किसानी के साथ-साथ रोजमर्रा के कामों से जुड़ी जानकारी भी लोगों को अपनी भाषा में मिल जाएगी। इसके अलावा विलुप्त हो रही छत्तीसगढ़ी संस्कृति व परंपरा को भी बचाया जाएगा।