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IIT भर्ती घोटाला: 550 पदों पर फर्जी तरीके से दे दी नौकरी, आरोप तय, पर अब तक कार्रवाई नहीं

प्रदेश में संचालित शासकीय आईटीआई (औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान) में प्रशिक्षण अधिकारियों की भर्ती में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है

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Mahanadi Bhawan

IIT भर्ती घोटाला: 550 पदों पर फर्जी तरीके से दे दी नौकरी, आरोप तय, पर अब तक कार्रवाई नहीं

रायपुर. प्रदेश में संचालित शासकीय आईटीआई (औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान) में प्रशिक्षण अधिकारियों की भर्ती में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। 2010 में रोजगार एवं प्रशिक्षण संचालनालय द्वारा जारी किए गए 723 पदों के लिए विज्ञापन की शर्तों और पात्रता को दरकिनार कर फर्जी तरीके से 550 से अधिक पदों पर भर्ती कर ली गई।

‘पत्रिका‘ के पास मौजूद सूचना का अधिकार के तहत मिले दस्तावेजों से पता चल रहा है कि साक्षात्कार सहित चयन के लिए बनी समिति के अधिकारियों ने मनचाहे अभ्यर्थियों को नौकरी देने के लिए उनके हाईस्कूल परीक्षा के पूर्णांक घटाकर उनके अंकों का प्रतिशत बढ़ा दिया। वहीं, विज्ञापन के दौरान एनसीवीटी (नेशनल काउंसिल ऑफ वोकशनल ट्रेनिंग) से मान्यता प्राप्त आईटीआई की डिग्री मांगी गई थी, जबकि कई अभ्यर्थियों को एससीवीटी (स्टेट काउंसिल ऑफ वोकशनल ट्रेनिंग) की पात्रता पर भी नौकरी दे दी गई।

साथ ही ड्राइवर कम मैकेनिक के लिए लाइट मोटर व्हीकल का ड्राइविंग लाइसेंस आवश्यक था, जबकि बिना लाइसेंसधारी को ही नौकरी मिल गई। वर्ष 2014 में गोलामाल की शिकायत पर लोक आयोग द्वारा चयन प्रक्रिया में लिप्त अधिकारियों के खिलाफ अवचार सिद्ध बताते हुए कार्रवाई की अनुशंसा की। लेकिन 5 वर्ष बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।

2014 में हुई थी शिकायत
वर्ष 2010 में विज्ञापन जारी होने के बाद विभागीय समिति गठन कर शैक्षणिक एवं तकनीकी योग्यता में प्राप्त अंकों के आधार पर मनचाहे अभ्यर्थियों का 16 अक्टूबर 2012 से 9 नवंबर 2012 तक साक्षात्कार लिया गया और जनवरी 2013 में चयन सूची जारी की गई। गड़बड़ी के दस्तावेज एकत्रित कर आरटीआई कार्यकर्ता कमलेश साहू ने शिकायत 14 फरवरी 2014 को लोक आयोग में की। दस्तावेजों की जांच के बाद 10 सितंबर 2014 को आयोग ने शिकायतकर्ता के पक्ष में आदेश सुनाया।

22 अधिकारी पाए गए दोषी
आयोग में प्रकरण क्रमांक 43/2014 की सुनवाई करते हुए लोकायुक्त शंभुनाथ श्रीवास्तव ने तत्कालीन संयुक्त संचालक ए.के. सोनी सहित संचालक एवं 20 अन्य अधिकारियों पर दोषी माना। साथ ही शासन स्तर पर नियमानुसार विभागीय कार्रवाई जल्द शुरू करने के लिए कहा और तीन महीने के अंदर की गई कार्रवाई के बारे में आयोग को बताने का निर्देश दिया। इसके बाद मामले पर विभागीय जांच बिठाई गई लेकिन अब तक इसका निराकरण नहीं हो पाया है।

फर्जीवाड़े को ऐसे समझें
200 से अधिक सरकारी आईटीआई
2010 में 723 पदों पर विज्ञापन
32 ट्रेड थे शामिल
40 हजार से अधिक आवेदन
2012 में साक्षात्कार
2013 में चयन सूची
2014 में आयोग में अवचार सिद्ध
22 अधिकारियों पर कार्रवाई की अनुशंसा
2019 में भी काबिज हैं अधिकारी

निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी
छत्तीसगढ़ शासन के तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री उमेश पटेल ने बताया कि मामले से संबंधित सभी दस्तावेजों की जांच करनी होगी। यह भी देखना होगा कि प्रकरण कहां अटका है। अगर लोक आयोग ने अवचार सही पाया है, तो लिप्त अधिकारियों पर निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी।