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स्काईवॉक पर सरकार ने लगाया ब्रेक, तोड़ने या दूसरे उपयोग का फैसला जांच के बाद

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में शुक्रवार को विधानसभा परिसर में हुई बैठक में इस निर्माण को एक सुर से गैर जरूरी बता दिया गया

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स्काईवॉक पर सरकार ने लगाया ब्रेक, तोडऩे या दूसरे उपयोग का फैसला जांच के बाद

रायपुर. राजधानी में विवादास्पद परियोजना स्काइवॉक की उड़ान पर सरकार ने ब्रेक लगा दिया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में शुक्रवार को विधानसभा परिसर में हुई बैठक में इस निर्माण को एक सुर से गैर जरूरी बता दिया गया।मुख्यमंत्री ने इस निर्माण की पूरी प्रक्रिया की विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।

अभी तक बन चुके ढांचे को तोडकऱ हटा देने अथवा उसका कोई वैकल्पिक उपयोग तय करने का फैसला शहर के विभिन्न वर्गों के साथ चर्चा करने के बाद लिया जाएगा। ताकि यातायात, सुरक्षा और आसपास के बाजारों में व्यापार पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े। पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने 2016-17 में 1470 मीटर लंबे स्काइवॉक का काम शुरू कराया था। मूल रूप से 42 करोड़ 55 लाख रुपए की यह परियोजना 8 माह में पूरी होनी थी, लेकिन इसको फिर से बढ़ाया गया। अब इसकी कुल लागत 77 करोड़ रुपए हो गई है।

इस परियोजना का 60 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। अधिकारियों ने बताया, सरकार ने 34 करोड़ रुपए का भुगतान भी कंपनी को कर दिया है। विधानसभा में कांग्रेस के विधायक बार-बार इस योजना को गैरजरूरी और सरकारी धन का अपव्यय बताते रहे हैं। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के विधायकों ने भी इसका विरोध किया है। मुख्यमंत्री ने गुरुवार को इसके भविष्य पर चर्चा के लिए बैठक बुलाने की घोषणा की थी।

यह लोग थे बैठक में शामिल: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, लोक निर्माण मंत्री ताम्रध्वज साहू, रायपुर महापौर प्रमोद दुबे, विधायक सत्यनारायण शर्मा, धनेन्द्र साहू, कुलदीप जुनेजा, विकास उपाध्याय, अनिता शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष शारदा वर्मा, लोनिवि के अपर मुख्य सचिव अमिताभ जैन, संभाग आयुक्त जीआर चुरेन्द्र, कलक्टर आर बसवराजु, आइजी आनंद छाबड़ा, लोनिवि के प्रमुख अभियंता डीके अग्रवाल।

पहले तय था फ्लाइओवर
बैठक में महापौर प्रमोद दुबे ने बताया कि स्काइवॉक से पहले इस स्थान पर दो फ्लाइओवर बनाने का प्रस्ताव था। वह महत्वपूर्ण चौराहों के साथ-साथ रेलवे स्टेशन से लेकर टाटीबंध और तेलीबांधा को जोड़ते। लेकिन, उसकी जगह पर इस स्काईवॉक को ला दिया गया।

मंत्री लोक निर्माण विभाग के ताम्रध्वज साहू ने बताया कि यह रायपुर शहर की महत्वपूर्ण योजना है। जैसा सुझाव यहां की जनता, जनप्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों और इंजीनियरों आदि से प्राप्त होगा, उस पर अमल किया जाएगा।