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होश उड़ाने लगे सब्जियों के भाव, तेल और शक्कर में अगले सप्ताह से लगेगी आग

प्रतिदिन भाव तय करने की छूट के बाद पेट्रोल-डीजल कंपनियों को मानो मनमानी करने की छूट मिल गई है। नियंत्रण के प्रभावी कदम नहीं उठाने के बाद यह क्षेत्र कोरोना संक्रमण काल का फायदा उठाने पर आमादा है।

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भाटापारा. 10 दिन, 10 भाव और प्रतिदिन बढ़ी हुई कीमत, दसवें दिन भी आई तेजी। पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं। अब तेजी के बाद बाजार भी हलाकान है। वहीं ट्रांसपोर्ट कंपनियां बढ़ते खर्च की पूर्ति के रास्ते तलाश रही है। सराफा बाजार को छोड़कर प्रत्येक सेक्टर डीजल की बेलगाम कीमतों से परेशान है। बीते 10 दिन में जिस तरह प्रति लीटर भाव बढ़े उसके बाद अंतर प्रांतीय कारोबार में प्रमुख ट्रांसपोर्ट सेक्टर अब माल भाड़ा बढ़ाने में लगा है।

खाद्य पदार्थों के परिवहन किराया में 5 से 7 फीसदी बढ़ोतरी के बाद लोडिंग की जा रही है तो सब्जियों में यह भाड़ा 8 से 9 फीसदी तक बढ़ाए जा चुके हैं। एक यही क्षेत्र है, जिसने सबसे पहले खुदरा बाजार में कीमतें बढ़ा दी है। प्रतिदिन भाव तय करने की छूट के बाद पेट्रोल-डीजल कंपनियों को मानो मनमानी करने की छूट मिल गई है। नियंत्रण के प्रभावी कदम नहीं उठाने के बाद यह क्षेत्र कोरोना संक्रमण काल का फायदा उठाने पर आमादा है।

आपदा को अवसर में बदलने का मौका शायद इससे पहले तेल कंपनियों को नहीं मिला। इसलिए देश के इतिहास में यह शायद पहला मौका है जब डीजल की कीमतें पेट्रोल के बराबर आकर खड़ी हो चुकी है। इसका असर सबसे पहले उपभोक्ता बाजार पर पडऩे लगा है। दैनिक उपयोग की चीजें महंगी होने लगी है। खासकर सब्जियों में तेजी सबसे पहले आ चुकी है, अब बारी है खाद्य तेल, दाल, गुड़ और शक्कर सहित उन चीजों की जिनकी जरूरत हर रोज पड़ती है।
सब्जी भाड़ा में 8 से 9 फीसदी की बढ़ोतरी

डीजल की कीमतें बढऩे का पहला असर फल और सब्जी मंडी पर पड़ चुका है। जल्द खराब होने की वजह से इसे ज्यादा दिनों तक रखा नहीं जा सकता। लिहाजा डीजल की कीमतों में तीसरी तेजी के बाद ही भाड़ा बढ़ा दिया गया। अपने प्रदेश में आलू के लिए उत्तर प्रदेश तो लहसुन और प्याज के लिए महाराष्ट्र पर ज्यादा निर्भरता है। कुल मांग की 80 फीसदी आपूर्ति इन्हीं राज्यों से होती रही है।

लिहाजा इन राज्यों की ट्रांसपोर्ट कंपनियों ने छत्तीसगढ़ के लिए माल भाड़ा 8 से 9 प्रतिशत बढ़ा दिए हैं। खरीफ सत्र और बारिश के बाद लोकल सब्जी बाडिय़ों में उद्यानिकी फसलों का रकबा तेजी से घटा है, इसलिए सब्जी के अधिकांश किस्मों की मांग की आपूर्ति मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और महाराष्ट्र से हो रही है। भाड़ा बढऩे के बाद आ रही यह सब्जियां अब खरीदी की सीमा से बाहर होती नजर आ रही है।
इस क्षेत्र में 5 से 7 फीसदी तक बढ़ गया भाड़ा

खाद्य तेल, गुड़, शक्कर और दाल दैनिक उपयोग की चीजों में सबसे पहले नंबर पर है। इनकी मांग की आपूर्ति के लिए महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश और कर्नाटक पर निर्भर है। गुड़ के लिए जहां उत्तरप्रदेश का मुंह ताकना पड़ता है तो शक्कर के लिए महाराष्ट्र तक दौड़ लगानी पड़ती है। दाल के लिए हमारी निर्भरता शुरू से कर्नाटक पर रही है तो खाद्य तेलों के लिए आंध्रप्रदेश की मदद की दरकार रहती आई है।

हालांकि प्रदेश में काफी हद तक राजनांदगांव से आपूर्ति हो रही है, लेकिन ब्रांडेड तेलों के लिए हम अब भी पड़ोसी राज्यों पर निर्भर हैं। इन राज्यों से छत्तीसगढ़ के लिए निकलने वाली ट्रकों ने माल भाड़ा में 5 से 7 फीसदी वृद्धि की जानकारी कंपनियों तक पहुंचा दी है। बाजार में उठाव नहीं है, लेकिन ऑर्डर अब बढ़े हुए भाड़े पर बुक किए जा रहे हैं। इसमें कीमतें कितनी बढ़ती है यह अगले सप्ताह ही पता चल पाएगा।

टैक्सटाइल्स में एक प्रतिशत बढ़ा भाड़ा

कपड़ा बाजार के लिए वैसे भी मानसून का सीजन कम ग्राहकी वाला माना जाता है, लेकिन बाद के त्योहारी दिनों की तैयारियों के लिए ऑर्डर इसी माह से दिए जाने लगते हैं। मूलत: गुजरात और राजस्थान पर कपड़े के लिए निर्भरता पर भी डीजल की बढ़ती कीमतों का असर पड़ेगा। ट्रांसपोर्ट कंपनियों ने गुजरात और राजस्थान की टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज को सूचना भेज दी है कि वह आने वाले कुछ दिनों में छत्तीसगढ़ के लिए भाड़ा में एक प्रतिशत की वृद्धि कर रहे हैं।

कपड़ा बाजार सूत्रों का कहना है कि इसका असर उपभोक्ता पर नहीं पड़ेगा, क्योंकि कारोबार जगत बढ़े हुए भाड़े की भरपाई मुनाफा का प्रतिशत कम करके पूरा कर लेगा। इतना जरूर है कि कोलकाता और इंदौर से आने वाले रेडीमेड गारमेंट्स की कीमतों पर असर जरूर पड़ेगा, क्योंकि यहां से 4 से 5 प्रतिशत परिवहन व्यय बढ़ाने के संकेत मिल रहे हैं।
इन क्षेत्रों में भी हलचल के संकेत

स्टील और सीमेंट सेक्टर में फिलहाल भाड़ा नहीं बढ़ा है, लेकिन स्टील सेक्टर से संकेत मिल रहे हैं कि यह क्षेत्र 5 प्रतिशत परिवहन दर बढ़ाकर पहुंच सकता है। इसलिए होलसेल और रिटेल काउंटर इसके लिए तैयार है। उपभोक्ताओं से कहा जा रहा है कि वह चाहे तो अभी खरीदी कर सकते हैं। सीमेंट इंडस्ट्रीज से अभी कोई खबर नहीं है, लेकिन यहां भी विचार जारी है।

यहां सब शांत है, ग्राहक भी नहीं

सराफा, बर्तन, कॉस्मेटिक्स, मेडिसिन सेक्टर शांत है, ग्राहक की भी नहीं है। कोरोना काल में उपभोक्ताओं की राह तकता यह बाजार इस समय भरपूर स्टाफ के साथ उपस्थित हैं। लिहाजा इस क्षेत्र में फिलहाल तेजी के कोई आसार नहीं है क्योंकि यहां के लिए गाडिय़ां लोड नहीं की जा रही है, इसलिए यहां सब शांत है।