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बिलासपुर स्टेशन में गुरुदेव ने रची थी फांकी, यहां आज भी बनी धरोहर

स्टेशन पर ६ घंटों के दौरान पत्नी के साथ बीते पल व अनुभव को लिखा  

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बिलासपुर स्टेशन में गुरुदेव ने रची थी फांकी, यहां आज भी बनी धरोहर

बिलासपुर स्टेशन में गुरुदेव ने रची थी फांकी, यहां आज भी बनी धरोहर

बिलासपुर. देश के विख्यात कवि रविंद्र नाथ टैगोर वर्ष 1918 में पत्नी मृणालिनी देवी के साथ बिलासपुर रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। यहां बिताए 6 घंटों के दौरान उन्होंने पत्नी के साथ बिताए पल व अपने अनुभव को साझा करते हुए (फांकी) कविता की रचना की थी। इस कविता को रेलवे ने सहेज कर शिला लेख के माध्यम से जीवत कर रखा है। बिलासपुर रेलवे स्टेशन के वीआईपी गेट नंबर.2 में शिलालेख पर तीन भाषाओं हिंदी, अंग्रेजी व बंगला भाषा में उनकी कविता सहेज कर रखी गई है।

एसईसीआर जोन बिलासपुर के सीनियर पीआरओ संतोष कुमार ने बताया कि जिस यात्री की नजर इस पर पड़ती है, रविंद्र की यादें जाता हो उठती हैं। रेलवे अधिकारियों के अनुसार साहित्यकार रविंद्र नाथ टैगोर द्वारा रचित फांकी सिर्फ रचना ही नहीं, प्रेरणादायी है। यह देश के लिए अमूल्य धरोहर है, जिसे सहेजना व लोगों को इसका महत्व बताना बेहद जरूरी है। बिलासपुर रेलवे स्टेशन में 6 घंटे रुकने के दौरान गुरूदेव रविंद्र नाथ टैगोर ने फांकी कविता की रचना की थी। यह एक अमूल्य धरोहर है। रेलवे ने इसे सहेज कर रखा है।

पेंड्रा सेनेटोरियम में पत्नी का कराया था इलाज

पेंड्रा पहुंचने के बाद गुरुदेव ने यहां स्थिति सेनेटोरियम के क्षयरोग वार्ड में अपनी धर्मपत्नी को इलाज के लिए भर्ती कराया। 81 दिन लंबे चले इलाज के दौरान उनकी पत्नी मृणालिनी देवी मृत्यु हो गई थी।