
दिव्यांगों के लिए नए नियम, सरकारी जमानतदार के बिना व्यापार करने नहीं मिलेगा कर्ज
अखिल शर्मा @ रायपुर. सरकार की किसी भी योजना के तहत कर्ज लेने के लिए दस्तावेज और गारंटर की जरूरत पड़ती है, लेकिन दिव्यांगों के मामलों में नियम ऐसा नहीं है। यदि कोई दिव्यांग अपना स्वयं का व्यापार करना चाहता है, तो उसे कर्ज लेने के लिए दस्तावेज के साथ-साथ सरकारी विभाग में काम करने वाला एक गारंटर भी चाहिए होगा। इसके बिना उन्हें छत्तीसगढ़ नि:शक्तजन वित्त एवं विकास निगम कर्ज नहीं देगा। जबकि दिव्यांगों को कर्ज में कई तरह की छूट दी जाती है। नियमों में बदलाव की वजह से अब दिव्यांगों को दोहरी परेशानी उठानी पड़ रही है।
3 करोड़ की वसूली अटकी, इसलिए बदला नियम
छत्तीसगढ़ नि:शक्तजन वित्त एवं विकास निगम ने रायपुर जिले में ही जिन दिव्यांगों को कर्ज दिया था, उनमें से 152 ने कर्ज वापस नहीं किया है। इन्हें 3 करोड़ 90 लाख 12 हजार 34 रुपए का लोन दिया गया था। इनमें से 2 करोड़ 98 लाख 16 हजर 438 का कर्ज वापस नहीं हुआ है। इसके चलते नए लोगों को लोन देने के नियम में बदलाव किया गया है। साथ ही जिनने लोन की किस्तें नहीं चुकाई हैं, उनके लिए कुर्की के आदेश भी जारी किया गया है।
यह हो रहा नुकसान
नियम में बदलाव होने के चलते नए हितग्राही इस स्वरोजगार ऋण योजना से वंचित हो रहे हैं क्योंकि अधिकतर दिव्यांग जनों के पास कोई शासकीय कर्मचारी गारंटर के रूप में नहीं है। जिनके कोई परिचित शासकीय कर्मचारी हैं तो वह उसके गारंटर बनने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं।
भारत सरकार द्वारा विकलांगों के आत्मनिर्भरता के लिए अनेक योजनाएं प्रारंभ की गई हैं। इसमें दिव्यांगजन स्वरोजगार ऋण योजना भी शामिल हैं। इसमें निम्न ब्याज दरों के आधार पर कर्ज दिया जाता है। इस बीच इस लोन के नियमों में बदलाव ने दिव्यांगों की परेशानी बढ़ा दी है।
रायपुर जिले से अब तक लगभग 3 करोड़ की लोन की राशि नहीं मिल पाई है, जिसके चलते वित्त विकास निगम द्वारा नियम में बदलाव किया गया है। कुछ के कुर्की के आदेश भी जारी किए गए हैं।
- भूपेन्द्र पान्डेय, संयुक्त संचालक, समाज कल्याण विभाग
Published on:
13 Aug 2022 02:43 pm
बड़ी खबरें
View Allरायपुर
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
