
Tea-Coffee Side Effects: file photo
Tea-Coffee Side Effects: चाय-कॉफी की ज्यादा लत से ब्रुक्सिज्म (Bruxism) नामक बीमारी हो रही है। इस बीमारी में गहरी नींद में सोते हुए भी दांत पीसने लगता है। डॉक्टरों की मानें तो इसका सबसे बड़ा कारण ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया है। एक अंदाज के मुताबिक दुनिया में हर 5 में से 1 व्यक्ति को दांत पीसने की बीमारी है। इसके कारण न केवल नींद प्रभावित होती है। बल्कि, सांस लेने में तकलीफ, दांतों में दर्द और सेंसिटिविटी जैसी परेशानियां भी आने लगती हैं। अधिक मात्रा में चाय-कॉफी पीने के अलावा धूम्रपान करने से भी ब्रुक्सिज्म होने की संभावना बढ़ जाती है। इसकी वजह से स्ट्रेस, थकान, नींद कम आना और गुस्सा बढ़ने जैसी समस्या आ सकती है।
बचाव के उपाय... सोते वक्त मोबाइल न चलाएं, 6 से 8 घंटे की नींद जरूर लें: डॉक्टरों के अनुसार, ब्रुक्सिज्म से बचने के लिए नींद पूरी करना जरूरी है। कम से कम व्यक्ति को 6 से 8 घंटे की नींद लेनी ही चाहिए। इससे जबड़े की मांसपेशियों को आराम मिलेगा। ब्रुक्सिज्म के पेशेंट को सोते समय टीवी या मोबाइल का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना चाहिए। वहीं ज्यादा चाय-कॉफी पीने की आदत तो इसे कंट्रोल करने की कोशिश करें। संभव हो तो माउथ गार्ड या बाइट गार्ड का इस्तेमाल करें। डॉक्टर से संपर्क जरूर करें।
ऐसे पहचानिए... मुंह के मसल्स और मसूड़ों में कहीं दर्द तो नहीं?
आपको ब्रुक्सिज्म बीमारी होने वाली है, इसका पता लगाना है तो पहले यह पता लगाइए कि कहीं आपके मुंह के मसल्स और मसूड़ों में दर्द तो नहीं हो रहा। इसमें सुबह उठते ही सिर में हल्का दर्द रहता है। जबड़े अकड़े हुए लगते हैं। दांतों में सेंसिटिविटी हो जाती है। कई लोगों को इसकी वजह से लगातार स्ट्रेस, थकान, गुस्से का सामना भी करना पड़ता है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट, जानिए...
ब्रुक्सिज्म मुख्यत: आयरन की कमी से होने वाली बीमारी है। लेकिन, बदलती जीवनशैली भी कई प्रकार की बीमारियों को जन्म दे रही है। ब्रुक्सिज्म भी इनमें से एक है। ये बीमारी चाय-कॉफी ज्यादा पीने के अलावा ऐसे बच्चों को भी हो सकती है जो जल्दी डर जाते हैं। बीमारी से बचना है तो जरूरी है कि चाय-कॉफी और धूम्रपान को अवॉइड करें।
डॉ. सुरभि दुबे, साइकाट्रिस्ट
ब्रुक्सिज्म पीड़ितों के आराम के लिए जरूरी है कि उनका ब्लड फ्लो सुधरे। इससे उनकी मांसपेशियों को आराम मिलेगा और वे रिलैक्स फील करेंगे। इसके बाद दांत पीसने की प्रक्रिया भी कम हो जाएगी। इसके साथ एक सुझाव यह भी है कि एक बार डॉक्टर से संपर्क जरूर करें। डॉक्टर की देखरेख में जांच और इलाज से ही बीमारी खत्म होगी।
डॉ. मनीष पाटिल, मेडिसिन
Published on:
05 Feb 2023 02:38 pm
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