
MBBS Degrees Being Sold for ₹16 Lakhs in MP- Demo pic
MBBS Admission: छत्तीसगढ़ के रायपुर प्रदेश में लगातार दूसरे साल सरकारी मेडिकल कॉलेजों में हिंदी माध्यम से एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू नहीं हो पाई है। इसका प्रमुख कारण है विद्यार्थियों की इस माध्यम में रुचि नहीं होना। 22 सितंबर से कक्षाएं शुरू हो चुकी हैं, लेकिन किसी भी छात्र ने हिंदी माध्यम से पढ़ाई के लिए आवेदन नहीं किया है।
पिछले सत्र में भी गिनती के छात्रों ने आवेदन किया था। एक कॉलेज में 2-3 विद्यार्थियों ने हिंदी माध्यम में पढ़ने की इच्छा जताई थी, लेकिन संख्या कम होने के कारण अलग से क्लास नहीं लगी। यही नहीं वार्षिक परीक्षा में भी किसी ने हिंदी माध्यम नहीं चुना।
प्रदेश सरकार ने 14 सितंबर 2023 को हिंदी दिवस के मौके पर प्रदेश के 10 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में हिंदी माध्यम से एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू करने की घोषणा की थी, लेकिन यह सिर्फ घोषणा ही साबित होकर रह गई। पत्रिका की पड़ताल में पता चला है कि किसी भी कॉलेज में हिंदी माध्यम से एमबीबीएस की पढ़ाई नहीं हो रही है।
लाइब्रेरी में जरूर हिंदी की कुछ किताबें रखीं गई हैं। इनको पढ़ने वाला भी कोई नहीं है, क्योंकि छात्रों को पहले से ही फैकल्टी कुछ टॉपिक हिंदी में समझाते हैं। स्थानीय फैकल्टी हिंदी अच्छी तरह समझती है इसलिए छात्रों की सुविधा के लिए ऐसा किया जाता है। हालांकि परीक्षा का माध्यम अंग्रेजी ही होता है।
हिंदी दिवस पर 2023 में पत्रिका कार्यालय पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने कहा था कि हिंदी माध्यम से एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए किताबें पर्याप्त हैं। हालांकि छात्रों की अरुचि के कारण सरकार की तैयारी धरी रह गई। दूसरी ओर एमबीबीएस छात्र छत्तीसगढ़ी बोल सकें, इसके लिए 7 साल पहले नेशनल मेडिकल कमीशन ने स्थानीय बोली की जानकारी छात्रों को सिखाने का आदेश दिया था।
देश में जबलपुर में हिंदी माध्यम के मेडिकल कॉलेज के लिए तैयारी है। इसके लिए प्रस्ताव भी बन चुका है, लेकिन अभी इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। हालांकि यहां भी विद्यार्थी हिंदी माध्यम से प्रवेश लेने के बाद अंग्रेजी में ही पढ़ाई करेंगे। क्योंकि जो भी किताबे हैं उनमें अंग्रेजी के ही शब्दों का अधिक उपयोग किया गया है।
यूपी, मप्र, उत्तराखंड, बिहार में भी हिंदी माध्यम से पढ़ाई का निर्णय लिया जा चुका है। हिंदी माध्यम से एमबीबीएस की पढ़ाई तभी हो पाएगी, जब छात्र रुचि लेंगे। सरकार की तैयारी पूरी थी। कॉलेजों को भी जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए थे। -डॉ. यूएस पैकरा, डीएमई
हिंदी में एमबीबीएस के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग ही उदासीन बना रहा। किसी भी मेडिकल कॉलेज में दिशा निर्देश तक नहीं भेज पाया। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने पिछले साल गाइडलाइन के लिए शासन को पत्र जरूर भेजा था, लेकिन इसमें कोई खास कार्रवाई नहीं हुई।
मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए तीन राउंड की काउंसलिंग पूरी हो चुकी है और सरकारी कॉलेजों की सभी सीटें पैक हो चुकीं हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह तय है कि हिंदी माध्यम से पढ़ाई के लिए ऑल इंडिया व सेंट्रल पूल वाले छात्र विकल्प नहीं चुनेंगे। यानी स्टेट कोटे वाले छात्र ही हिंदी माध्यम में पढ़ाई कर सकते हैं, वे भी इसमें रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
Updated on:
15 Nov 2025 09:37 am
Published on:
15 Nov 2025 09:36 am
बड़ी खबरें
View Allरायपुर
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
