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हिंदू राष्ट्र तो रावण व कंस के पास भी था, इसलिए रामराज्य चाहिए : स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती

हिंदू राष्ट्र की कोई जरूरत नहीं है। इसलिए हम रामराज्य की ही कामना करते हैं। हिंदू राष्ट्र के सवाल पर शंकराचार्य ने कहा कि ये नहीं चाहिए, क्योंकि हिंदू राष्ट्र तो रावण और कंस के पास भी था, परंतु दोनों के शासनकाल से प्रजा दुखी और परेशान थी।

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ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती

रायपुर. Shankaracharya in chhattisgarh : ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सबसे आदर्श कोई राज्य था तो वह रामराज्य था, जिसमें प्रजा सुखी थी। इसलिए हिंदू राष्ट्र की कोई जरूरत नहीं है। इसलिए हम रामराज्य की ही कामना करते हैं। हिंदू राष्ट्र के सवाल पर शंकराचार्य ने कहा कि ये नहीं चाहिए, क्योंकि हिंदू राष्ट्र तो रावण और कंस के पास भी था, परंतु दोनों के शासनकाल से प्रजा दुखी और परेशान थी। शुक्रवार को रायपुर प्रवास पर आए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अनेक चर्चित मुद्दों पर चर्चा करते हुए ये बातें कही।

ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के परम शिष्य हैं शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद महाराज। यहां अपने प्रवास के दौरान महाराज दुर्ग जिले में श्रीमद् भागवद् कथा पुराण करने आए हैं। यहां पहुंचने पर रायपुर में शंकराचार्य ने देश में चल रहे कई मुद्दों पर मीडिया से खुलकर बातचीत करते हुए अपनी राय व्यक्त किए। इस दौरान मुगलों के चैप्टर को पाठ्यक्रम से हटाए जाने, संत-महात्माओं के राजनीतिक में अपनी भूमिका निभाने जैसे कई विषयों पर खुलकर बोले।

राजनीतिक संत हिंदू महात्मा नहीं
जो संत राजनीतिक पार्टी के हो जाते हैं, वह हिंदू महात्मा नहीं हैं। राजनीतिक दल के नेता धर्मनिरपेक्ष होकर काम करने की शपथ लेते हैं। चाहे भाजपा हो या कांग्रेस या अन्य कोई राजनीतिक दल। इसलिए जो संत महात्मा जब राजनीतिक दल में चले जाते हैं तो वो धार्मिक नहीं रह जाते। वो धर्मनिरपेक्ष हो जाते हैं। जबकि देश में कई साधु-संत हैं जो राजनीतिक दलों से संबंध नहीं रखते हैं।

हिंदू राष्ट्र की मांग करने वाले अमित शाह को घेरें
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के हिंदूराष्ट्र नहीं चाहिए के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि जब देश के गृह मंत्री अमित शाह ने इंटरव्यू में जब ये कह दिए है कि देश बाबा साहेब आंबेडकर के बनाए संविधान के अनुसार चलेगा, उसके बाद जितने भी हिंदू राष्ट्र की मांग करने वाले लोग हैं। उन्हें तो अमित शाह का घेराव कर देना चाहिए।क्योंकि हिंदू राष्ट्र तो छत्तीसगढ़ से या किसी दूसरे राज्य से लागू नहीं होगा। यह तो पूरे देश में लागू होगा। शंकराचार्य ने बिल्कुल सही बात कही है। रामराज्य की बात महात्मा गांधी ने भी कही थी। जब कोई अच्छा काम होता है तो लोग कहते हैं रामराज्य आ गया है, यह एक आदर्श स्थिति है।

पाठ्यक्रम से मुगलों के चैप्टर विषय पर भी बोले
हिंदू राष्ट्र बनाने के मुद्दे को देश में जोरशोर से माहौल बनाने और स्कूली पाठ्यक्रम से मुगलों के चैप्टर को हटाने के सवाल पर शंकराचार्य खुलकर बोले। उन्होंने कहा कि जब हिंदू राष्ट्र की बातें करने वालों ने कोई प्रारूप ही नहीं बनाया है तो यह कैसे माना जाए कि हमारे जीवन में क्या बदलाव आएगा। हिंदू राष्ट्र से क्या होगा, कुछ पता ही नहीं, इसलिए हम इसका समर्थन नहीं करते हैं। न विरोध। एनसीआरटी की किताबों से मुगलों के चैप्टर हटाए जाने पर कहा कि, पहले हमारे राजाओं को छोड़कर केवल मुगल-मुगल पढ़ाया और अब पूरी तरह से हटा देना उतना ही गलत है। जितना की पहले गलत था। इतिहास के मामले में तो तटस्थ रहना चाहिए। जो जैसा है उसे वैसा ही पढ़ाया जाए। यदि इसके पीछे ये सोच है कि हमारे बच्चे हिंदू राजाओं के बारे में जानें यह अच्छा है।

हिंदू खतरे में तब जब अपने धर्म से दूर होगा
हिंदू खतरे में नहीं है। ऐसी स्थिति तब बनेगी जब हिंदू अपने धर्म और संस्कार से दूर होते जाएंगे। शिक्षा व्यवस्था में बदलाव पर जोर देते हुए शंकराचाय्र ने कहा कि मदरसे में यदि धार्मिक पढ़ाई और मिशनरी स्कूलों में प्रेयर हो सकती है तो, स्कूलों में हिंदू धर्म की पढ़ाई क्यों नहीं हो सकती। संविधान में कहा गया है कि बहुसंख्यक समाज अपनी धार्मिक शिक्षा स्कूलों में नहीं ले सकते तो सबसे पहले इसे बदलना होगा। बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के इस बात का साईं बाबा भगवान नहीं हैं का समर्थन शंकराचार्य ने किया।