
कार्तिक पूर्णिमा मंगलवार को मनाई गई। यह दिन हिंदू, सिख और जैन, तीनों धर्मों के लिए खास रहा। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक हिंदुओं ने जहां इस दिन नदी-तालाबों में पुण्य स्नान किया। वहीं सिखों ने पहले गुरु नानकदेव की जयंती पर गुरुबाणी और कीर्तन में दिन बिताया। इधर, एक स्थान पर पिछले चार महीने से ध्यान-साधना कर रहे जैन संतों ने भी इस मौके पर अलग-अलग स्थानों के लिए विहार किया।
कार्तिक पूर्णिमा पर सबसे बड़ा कार्यक्रम महादेवघाट में हुआ। यहां मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तड़के आस्था की डुबकी लगाई और प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। सीएम ने कहा कि हमारे यहां धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक परंपरा का निर्वहन किया जाता है। पुन्नी मेले पर यहां आसपास के सभी गांवों के लोग आते हैं। पुन्नी मेला हमारी प्राचीन परंपरा है। हमारे छत्तीसगढ़ के गांवों और शहरों की परंपरा का हिस्सा है। इस दौरान संसदीय सचिव विकास उपाध्याय, गोसेवा आयोग के अध्यक्ष महंत रामसुंदर दास, सीएम के सलाहकार प्रदीप शर्मा, महापौर एजाज ढेबर आदि मौजूद रहे।
गुरु पर्व पर बोले- गुरुनानक जहां ठहरे, उसे पर्यटन स्थल बनाएंगे
सिख समाज ने कार्तिक पूर्णिमा पर अपने पहले गुरु नानक देव का 553वां प्रकाश पर्व मनाया। इस मौके पर शहर के 18 गुरुद्वारों में सत्संग, कीर्तन का आयोजन किया गया। मुख्य दीवान पंडरी स्थित खालसा स्कूल में सजाया गया। राज्यपाल अनुसुईया उईके, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, स्पीकर डॉ. चरणदास महंत समेत कई जनप्रतिनिधियों ने भी इसमें शिरकत की। इस मौके पर सीएम ने कहा कि गुरु नानक देव जी छत्तीसगढ़ भी पधारे। उन्होंने अमरकंटक के कबीर चबूतरे से लेकर महासमुंद के गढ़फुलझर तक यात्रा की। गढ़फुलझर में उन्होंने विश्राम किया और तपस्या भी की। समाज की मांग पर इसे बड़े पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया गया है। राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष महेंद्र छाबड़ा ने गुरुद्वारा नानक सागर के अध्यक्ष के तौर पर इस फैसले के लिए पूरे समाज की ओर से उनका आभार माना। इधर, छत्तीसगढ़ सिख संगठन के प्रतिनिधियों ने कार्यक्रम स्थल में सीएम से मुलाकात कर पंजाबी अकादमी और समाज के लिए भवन बनाने की मांग की। संगठन की ओर से यहां मेडिकल कैंप भी लगाया गया था। इस दौरान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष दलजीत सिंह चावला, संस्थापक हरपाल सिंह भामरा, लवली अरोरा, राजेंद्र सिंह होरा, बलजीत सिंह, रोमी भल्ला आदि मौजूद रहे।
इधर, जैन संत अब 8 माह पैदल ही विचरण करेंगे
शहर में इस बार 7 जगहों पर जैन साधु-साध्वियों के चातुर्मास हुए। ये 4 महीनों में जैन संतों ने एक ही जगह रहकर ध्यान-साधना की। कार्तिक पूर्णिमा के दिन सभी जगहों पर विराजित साधु-साध्वियों ने अलग-अलग दिशाओं के लिए विहार किया। अब तकरीबन 8 महीने तक वे पूरे देश की यात्रा कर धर्म का प्रचार करेंगे। जिन कुशल सूरी जैन दादाबाड़ी में इस मौके पर बड़ी पूजा की गई। महेंद्र कोचर ने बताया कि लाभार्थी परिवारों की ओर से गुरु प्रसादी का इंतजाम भी किया गया था।
Published on:
08 Nov 2022 10:17 pm
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