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इस गांव में होली के दो दिन बाद होती है ये अनोखी स्पर्धा, जहां जंगली गिलहरी और केकड़े लगाते हैं रेस

ग्राम पंचायत ताराबहरा के आश्रित ग्राम बैरागी में होली के दो दिन बाद शनिवार को अनोखी और रोमांचक खेल स्पर्धा का आयोजन किया गया

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इस गांव में होली के दो दिन बाद होती है ये अनोखी स्पर्धा, जहां जंगली गिलहरी और केकड़े लगाते हैं रेस

केल्हारी (कोरिया). ग्राम पंचायत ताराबहरा के आश्रित ग्राम बैरागी में होली के दो दिन बाद शनिवार को अनोखी और रोमांचक खेल स्पर्धा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर गांव की महिला और पुरुषों के बीच विविध व रोमांचक खेल स्पर्धा खेली गई। जिसमें जंगली मुर्गा, गिलहरी, नदी से केकड़ा व मछली पकड़ी गई।

जिला मुख्यालय से करीब 80 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत ताराबहरा का आश्रित ग्राम बैरागी बसा है। इस गांव में भारतीय कैलेंडर की होली त्योहार के ठीक तीसरे दिन परंपरागत और अनोखा खेल स्पर्धा का आयोजन किया गया। गांव के प्रतिभागी शनिवार को एकजुट होकर खुले मैदान में पहुंचे और जंगली मुर्गा, गिलहरी की रोमांचक दौड़ कराई गई। प्रतियोगिता में दो समूह में बंटकर जंगल और नदी की ओर चले गए। एक समूह पुरुष व बच्चे, दूसरे समूह में महिलाएं व युवतियां शामिल थीं। प्रतियोगिता में पहले दिन पुरुष जंगल में जाकर जंगली मुर्गा, गिलहरी और महिलाएं नदी में जाकर केकड़ा और मछली पकड़ी।

स्पर्धा के दूसरे दिन महिला, पुरुष और बच्चों के लिए प्रतियोगिता शुरू हुई। प्रतियोगिता के पहले चरण में पॉलीथीन लगाकर एक छोटा तालाब बनाया गया। जिसमें गांव की महिलाएं जो नदी से मछली और केकड़ा पकडकऱ लाई थीं, उसे छोड़ दिया गया। वहीं पुरुषों को निर्धारित समय पर तालाब से मछलियां और केकड़ा पकडऩा था। जिसमें सबसे अधिक केकड़ा और मछली पकडऩे वाले को विजयी घोषित किया गया। इस दौरान प्रतियोगिता के निर्णायक सीटी बजाकर निर्णय दिया।

सबसे तेज दौडऩे वाला केकड़ा विजेता बना
ग्रामीणों के बीच रोमांचक केकड़ा दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। महिलाएं नदी से केकड़ा पकड़ कर लाई थीं, उसे खुले मैदान में छोड़ा गया। इस दौरान सबसे तेज दौडऩे वाले केकड़े को विजेता के खिताब से सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता में ग्रामीण तयशुदा स्थान पर एक बड़ा घेरा बनाया था। जिसमें गांव के पुरूष और महिलाएं शामिल हुई। सीटी बजने के पुरूष वर्ग खरगोश और गिलहरी को एक साथ छोड़ दिया और खरगोश व गिलहरी को पकडऩे के लिए महिलाओं का समूह पीछे जंगल की ओर भागा।

‘अकाल नहीं पड़ता है’
ग्राम बैरागी के ग्रामीणों के अनुसार यह रिवाज वर्षों पहले शुरू की गई है। खेत में पुरुषों द्वारा छोड़ा गया मुर्गा और गिलहरी को अगर महिलाएं पकड़ लेती हैं तो गांव में वर्षभर अकाल नहीं पड़ता है। वहीं महिलाएं खरगोश व मुर्गा को नहीं पकडऩे पाने पर अर्थदण्ड लगाने का प्रावधान है। गया है। जिससे मिलने वाले राशि का सामूहिक भोज में खर्च किया जाता है।

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