15 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

टमाटर की खेती कर किसान हो रहे मालामाल, एक ही दिन में बेच रहे लाखों के टमाटर

टमाटर सदाबहार सब्जी है जिसकी खेती कर किसान लाखों रूपए कमा रहे हैं। जिले में मामा भांजा क ऐसी ही एक जोड़ी है जो एक ही दिन में लाखों रूपए के टमाटर बेच रही है।

2 min read
Google source verification
farming.jpg

रायगढ़। जिले के किसान खेती किसानी के क्षेत्र में टमाटर से लाल हो रहे हैं। ऐसे ही किसानों की बात करे तो जिले के सुर्री व छोटे भंडार के मामा-भांजा दो ऐसे किसान हैं, जो एक दिन में मामा ने एक ही दिन में 9 लाख तो भांजे ने भी ढाई लाख तो टमाटर बेचा है। हालांकि यह दर तब मिली जब बाजार में टमाटर के भाव सातवें आसमान पर थे।

सुर्री के किसान हेमंत चौधरी जिसे लोग दीपक के नाम से जानते हैं। वे बताते हैं कि एक साल पहले उन्होंने मामा तोष पटेल के मार्ग दर्शन में 6 एकड़ में खेती की शुरू की। उनका परिवार परंपरागत धान की खेती करता था, लेकिन इन्होंने धान की बजाए सब्जी की खेती ड्रीप सिस्टम से की। करेला, टमाटर, लौकी, खीरा व बैगन के साथ मिर्च पर ज्यादा फोकस किया।कृषि वैज्ञानिकों से समय-समय पर सलाह ली और फसल की मार्केटिंग पर फोकस किया। लोकल मार्केट के अलावा ओडिशा, झारखंड, बेंगलूरु के व्यापारियों से भी संपर्क रखा।

लीज में ली है जमीन
कृषक बताते हैं कि उनकी खुद की जमीन कम है। ऐसे में वे आसपास के किसानों से जमीन लीज पर ली है। अमूमन सब्जी की फसल के लिए एक एकड़ में करीब ढाई लाख रुपए का खर्च आता है। इसके बाद दूसरे सीजन में इसकी लागत कम हो जाती है।

प्रति एकड़ 50 से 70 टन के बीच
दीपक चौधरी बताते हैं लाभ या हानि उत्पादन पर निर्भर रहता है। हर फसल में प्रति एकड़ उत्पादन क्षमता अलग-अलग होती है। टमाटर के उत्पादन क्षमता प्रति एकड़ 50 से 70 टन छह माह के एक सीजन में लिया जा सकता है। हालांकि इससे अधिक भी इसका उत्पादन होता है। इस बीच यदि दर अधिक हुई तो किसानों को लाभ ज्यादा मिलता है।

मामा-भांजा किसानों पर गौर करे तो भांजा हेमंत चौधरी इंजीनियरिंग करने के बाद दिल्ली में आईएएस की तैयारी कर रहा था। उनके पिता शिक्षक थे। पिता के निधन के बाद उन्हें पिता के स्थान पर नौकरी मिल रही थी, लेकिन उन्होंने नौकरी की बजाए खेती की शुरू की। वहीं मामा तोष पटेल शिक्षाकर्मी हैं। इसके साथ वे खेती भी करते हैं।