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लो आ गया अब सोशल मीडिया एडिक्शन से निजात दिलाने वाला ऐप

रायपुर के युवाओं का इनोवेशन

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लो  आ गया अब सोशल मीडिया एडिक्शन से निजात दिलाने वाला ऐप

इस एेप के जरिए सोशल मीडिया की लत से छुटकारा दिलाने का दावा किया गया है।

ताबीर हुसैन @ रायपुर।क्या आप सोशल मीडिया एडिक्ट हैं? क्या आप चाहते हैं कि पार्टिकुलर किसी एक ऐप्स से कुछ घंटों या दिनों तक दूरी बनाई जा सके? तो आपके लिए खुशखबरी है। एक ऐसा ऐप्स तैयार किया गया है जिसमें आप जज हैं और कुसूरवार वह ऐप जो आपका ध्यान खींचते हैं। सिटी के जयेश और जागृत सूरीसेट्टी ने डिजिटल वेल्बीइंग का गेमिफ़ायड ऐप तैयार किया है जिसका नाम है एप्रीसन। ये दोनों भाई हैं। जयेश आईआईएम में हैं और स्टार्टअप चलाते हैं वहीं जागृत सूरीसेट्टी जो पेशे से इंजीनियर है और इस वक्त यूनिवर्सिटी ऑफ कैलीफोर्निया बक्र्ली में फेलोशिप कर रहे हैं। इनका दावा है कि यह इस तरह का दुनिया का पहला ऐप है। ऐप की लॉन्चिंग टॉप 15 स्टार्टअप ने नई दिल्ली में किया।

जॉब और रिश्तों पर असर

जयेश ने बताया कि एडिक्शन में स्टूडेंट्स ही नहीं बल्कि युवा भी शामिल हैं। इसके चलते ऑफिस में कार्यक्षमता 26 प्रतिशत तक कम हो गई है। घरों में साथ समय बिताना कम हो गया है। इस वजह से रिश्तों पर असर पड़ा है। एग्जाम की तैयारी शुरू हो चुकी है। पैरेंट्स को फिक्र है कि लाख मना करने के बाद भी बच्चे सोशल मीडिया से पिंड नहीं छुड पा रहे हैं।

जेल भेजना मतलब कुछ समय के लिए ब्लॉक करना

ऐप के जरिए कोर्ट रूम में यह पता चलता है कि आप किसी ऐप को कितना यूज कर रहे हैं। किस-किस वक्त उपयोग कर रहे हैं। इससे तय किया जा सकता है कि किस टाइम कितने घंटे के लिए उस ऐप को बंद किया जाए जिसमें टाइम ज्यादा स्पेंड हो रहा है।

रिवॉर्ड में मिलता है क्वाइन

मेंटर जवाहर सूरिसेट्टी ने बताया कि अगर आप ऐप के मुताबिक चलते हैं तो आपको बतौर रिवॉड्र क्वाइंस मिलते हैं। यह क्वाइंस आपको जरूरत के वक्त वाट्सऐप, फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्वीटर या जो भी प्लेटफॉर्म आपने चुना हो, उसे यूज करने के लिए निश्चित मिनट अवलेबल कराते हैं। ऐप को यूज करने से हैबिट बनती जाती है और लत ऑटोमेटिक छूटती जाती है।

ऑनलाइन दिखने का ट्रेंड

जागृत ने कहा कि इन दिनों 24 घंटे ऑनलाइन दिखने का ट्रेंड है। ऐसे में 10 मिनट के लिए भी कोई आपका मोबाइल ले ले तो बेचैनी महसूस होने लगती है। जाहिर है आप सोशल मीडिया एडिक्शन की जद में हैं। खासतौर पर टीनेज के लिए यह बड़ी समस्या है। क्योंकि एग्जाम का दौर शुरू होने को है। वे चाहकर भी मोबाइल से दूरी नहीं बना पाते, हालांकि टॉपर किस्म के छात्र तो पहले ही सोशल मीडिया को तिलांजलि दे चुके होते हैं, लेकिन एवरेज और इससे थोड़ा ज्यादा के बच्चे मोबाइल की गिरफ्त से बाहर नहीं निकल पाते। इससे सेहत पर असर तो पड़ता है जिंदगी अव्यवस्थित हो जाती है। इसे तैयार करने में करीब सालभर का वक्त लगा।