31 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Raipur News: ऐसे में कैसे थमेंगे अपराध : साल भर में 33 को जिलाबदर करने के प्रस्ताव, हुए केवल 5,सक्रिय बदमाशों पर नहीं हो रही सख्ती

Raipur News: पुलिस ने जिलाबदर के लिए 33 गुंडे-बदमाशों का प्रतिवेदन भेजा था, लेकिन इसमें से केवल 5 बदमाशों का ही जिलाबदर हो पाया है। पूरा साल बीत गया, लेकिन सभी का जिलाबदर नहीं हो पाया है।

2 min read
Google source verification
Raipur News: ऐसे में कैसे थमेंगे अपराध : साल भर में 33 को जिलाबदर करने के प्रस्ताव, हुए केवल 5,सक्रिय बदमाशों पर नहीं हो रही सख्ती

Raipur News: शहर में चाकूबाजी, हत्या, गुंडागर्दी, वसूली, नशाखोरी, अवैध कारोबार जैसे अपराधों के पीछे आदतन और सक्रिय हिस्ट्रीशीटरों की बड़ी भूमिका होती है। इनके खिलाफ सख्ती कैसे हो रही है? इसका अंदाजा इन बदमाशों की जिलाबदर की प्रक्रिया से लगाया जा सकता है कि पिछले एक साल में पुलिस ने जिलाबदर के लिए 33 गुंडे-बदमाशों का प्रतिवेदन भेजा था, लेकिन इसमें से केवल 5 बदमाशों का ही जिलाबदर हो पाया है।

पूरा साल बीत गया, लेकिन सभी का जिलाबदर नहीं हो पाया है। इस तरह से सक्रिय गुंडे-बदमाशों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है। मामला केवल कागजों में चल रहा है। यही वजह है कि आपराधिक गतिविधियों, तस्करी, गुंडागर्दी के मामलों में कमी नहीं आ रही है। कई हिस्ट्रीशीटर बेखौफ घूम रहे हैं और आपराधिक गतिविधियों को संचालित कर रहे हैं। कोई जुए का अड्डा चला रहा है, तो कोई सट्टे और नशे का कारोबार संचालित कर रहा है।
एक-एक साल की देरी

किसी हिस्ट्रीशीटर को जिलाबदर करने की प्रक्रिया पुलिस और जिला प्रशासन से होती है। पुलिस प्रस्ताव बनाकर देती है, जिस पर जिला प्रशासन में सुनवाई होती है। इसके बाद हिस्ट्रीशीटर को जिलाबदर किया जाता है, लेकिन इस प्रक्रिया में एक-एक साल का समय लग रहा है। जिलाबदर होने पर किसी हिस्ट्रीशीटर को 3 से 6 माह तक को रायपुर जिले से बाहर रहना होता है। बिना अनुमति के वह जिले की सीमा में भी प्रवेश नहीं कर सकता है। अगर प्रवेश करता है, तो उसे तत्काल गिरफ्तार कर लिया जाता है।

ऐसे लटकती है कार्रवाई

  • जिलाबदर के प्रस्ताव कम बनाए जाते हैं
  • पुलिस जिलाबदर के लिए जारी अधिकांश नोटिस की तामिली नहीं करा पाती है। इसके चलते प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती है।
  • जेल में बंद गुंडे-बदमाशों का भी जिलाबदर का प्रस्ताव भेज दिया जाता है।
  • कई बार जिला प्रशासन में मामलों की सुनवाई भी समय पर नहीं हो पाती है।शहर में गुंडे-बदमाशगुंडा-बदमाश-129

निगरानी बदमाश- 25
गैंग हिस्ट्रीशीटर-3

ये कर रहे हैं गुंडे-बदमाश

-जमीन-मकान में कब्जा दिलाना, खाली करवाना
-चाकूबाजी

-वसूली
-नशे का गोरखधंधा

-मर्डर
-लूटपाट

-जुए-सट्टे का संचालन
-अड्डेबाजी

-गैंग बनाकर गुंडागर्दी, रंगदारी
शहर में प्रमुख अपराध
मर्डर 90

हत्या का प्रयास 97
डकैती 7

लूट 71
नकबजनी 473

चोरी 1442
धोखाधड़ी 292

नारकोटिक एक्ट 271

वर्जन

कई मामलों में पुलिस समय पर नोटिस की तामिली नहीं करा पाती है, जिसके चलते प्रक्रिया बाधित होती है। नोटिस तामिल नहीं होने से उन मामलों की सुनवाई समय पर नही हो पाती है। जिला प्रशासन की ओर से जिलाबदर के मामलों में गंभीरता से कार्रवाई की जाती है।

  • डॉक्टर गौरव कुमार सिंह, कलेक्टर, रायपुर

अपराध में नियंत्रण के लिए सक्रिय गुंडे-बदमाशों को जिलाबदर करने का प्रस्ताव भेजा जाता है। इसमें पुलिस और जिला प्रशासन स्तर पर अलग-अलग प्रक्रियाएं रहती हैं। प्रस्तावित जिलाबदर की कार्रवाई किन कारणों से रुकी है? इसका पता लगाया जाएगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-डाक्टर लाल उमेद सिंह, एसएसपी, रायपुर

Story Loader